उनकी बेरुखी में भी इलतेफात शामिल है,
आज मेरी हालत देखने के काबिल है।
क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी,
मेरे मातम में आज मेरा क़ातिल भी है।
उत्तेजित है मौजे क्यूँ उठ रहे है तूफां क्यूँ,
क्या किसी सफिने को आरज़ू-ए-साहिल है।
सिर्फ राहजन ही से क्यूँ "पागल" शिकवा हो,
मंज़िलों की राहों में राहबर भी शामिल है।
✍?"पागल"✍?