*" घर और बाहर से एक सा हो तो ही बच्चे अच्छे बनते है "*
?घर परिवार के लोग अपने बच्चे को बहेलाते, फुसलाते, बत्तमीजी सेहते, हर ख्वाईस पुरी करते, लालच दे कर काम करवाते है गलती पर भी कुछ केहते नहीं | ऐसा सब घर पर चल जाता है बाहर के लोगों के सामने न जीद चलती न जुबान चलपाती न हाथ पांव | इसलिए ऐसे दो अलग-अलग वातावरण में रहने से बच्चों को मानसीक संतुलन कुछ अच्छा नहीं होता क्युकि घर पर कुछ ओर और बाहर कुछ ओर अगर सब जगह एक सा मीले तो ही संभव है | मतलब कि *" जहां गलत है वहां समझा कर सुधार ने की बात और जहां सही है वहां शाबाशी "* | घर से और बाहर के लोगों से एक सा होगा तभी बच्चे अच्छा सीख पाएंगे वरना एक दुसरे पर दोषारोपण करते रहेंगे घर परिवार ने बीगाडा या बाहर से बीगड गए कहा जाएगा |...ॐD