मेवाड़ की धरती को रोशन करने जन्मा एक सूरज था,
जयवंताबाई और उदय सिंह का वीर महाराणा बेटा था।
बिजलीसा चमकता भाला,तलवार हवा से बातें करती थी,
उस शूरवीर के तेज के आगे नतमस्तक खुद वीरता थी।
राणा की तरह उसका एक बहादुर घोड़ा था ,
नाम था 'चेतक' उसका बातें हवा से करता था ।
अमर सिंह ने वीर राणा के पीठ में छुरा मारा ,
घास की रोटी खाकर भटके जंगल-जंगल राणा ।
दूतों संग अकबर ने राणा को जब संधि प्रस्ताव भेजवाया,
पिंजरे में कौन कैद कर सकता है कहकर हुंकार लगाया।
हल्दीघाटी में दुश्मन ने फिर ललकार लगाई ,
सजा सजा कर अकबर ने अपनी सेना भिजवाई ।
एकलिंग का भक्त राणा बिजली सा टूट पड़े ,
मानो राणा खुद महाकाल के अवतार हुये ।
अकबर की सेना में पलभर में हाहाकार मचा,
राणा वह शेर था जिसे कोई पिंजरे में न कर सका।
राजस्थान की माटी एक बार फिर सोना कहलाई,
राणा ने राष्ट्रप्रेम,स्वाभिमान वीरता की कहानी दोहराई।
प्रज्ञा पाण्डेय
उन्नाव, उत्तर प्रदेश