#Moralstories
*भूख ?:*
आज मंगलवार हैl मैं और श्याम चौराहे के पास वाले हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ा के श्याम की बुआ जी को लेने बस अड्डे पहुंच गए, बस लेट थीl हम दोनों बस अड्डे के बाहर बात कर ही रहे थे कि चार पांच बच्चे आकर प्रसाद मांगने लगे, प्रसाद बांटते हुए मैंने देखा कि दूर एक बच्चा उदास बैठा हमारी ओर देख रहा थाl मैंने बच्चे को बुलाकर प्रसाद देना चाहा तो श्याम बोला अरे ये तो मुसलमान है इसीलिए यह प्रसाद लेने नहीं आया था और दूर से देख रहा थाl कई बार हम लोगों ने यह देखा था कि मुस्लिम बच्चे प्रसाद नहीं लेतेl मैंने बच्चे से पूछा, "प्रसाद लोगे क्या"? बच्चे ने चुप रहकर ही सर हिला कर हामी भर दी, बच्चे को मैंने एक लड्डू दे दियाl वह लड्डू ले कर जाने लगा तो श्याम बोला, "देखना वह लड्डू खाएगा नहीं"l मुझे लगा कि शायद उसने हमारे डर से लड्डू ले लिया तभी बच्चे ने कहा यह लड्डू मैं अम्मी को दूंगा जाकर, घर में कल से कुछ भी खाने को नहीं हैl मैं और श्याम निशब्द रह गए और सोचते रहे क्या कोई भी धर्म, जाति, रूप, रंग, लिंग, भूख और गरीबी से बड़ा है lसच ही कहा है किसी ने गरीबी ही रिश्तो की अहमियत सिखाती है और उन्हें जोड़ कर रखती है और भूख सभी भेदभाव तोड़ती है l