Hindi Quote in Story by Sunita Pawar

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छोटू

कूड़ा ! आवाज़ सुनते ही ममता कूड़ा ले कर बाहर आई । कूड़ा उठाने वाले के साथ ग्यारह-बारह साल का लड़का भी था ।

"ये कौन है?" ममता ने पूछा..।

"मेरा बेटा छोटू" ।

"इसको स्कूल क्यूँ नहीं भेजते? "

"भाभीजी इतना नहीं कमाते की स्कूल भेज सकें..काम सीखेगा तो खा सकेगा।"

"आंटी भूख लगी है" छोटू ने कहा ।

"तेरा स्कूल जाने का मन नहीं करता?" छोटू ने खाते हुये हां में सिर हिलाया । ममता ने कहा "ठीक है, मैं तुझको थोडा बहुत पढ़ा दिया करूंगी।"



ममता के निर्णय से सास-ससुर बहुत नाराज़ हुए । "बहु ये लोग चोर होते हैं, रहने दे" । जब ममता नही मानी तो माँ-पिताजी ने कह दिया "इसको घर से बाहर ही पढाना" । छोटू ममता से खाना मांगता ओर पढने लगता ।



छोटू थोडा बहुत हिसाब लगाना और नाम लिखना सीख गया।



दरवाजे की घंटी बजते ही सास-ससुर कहते "आ गया भिखारी"..। छोटू ने पूछा "आंटी ये लोग कब तक मुझे भिखारी बोलते रहेंगे" ममता ने कहा "जिस दिन तू खाना मांगना छोड़ देगा और अपनी मेहनत का खायेगा..।

"नमस्ते अंकल,कुछ समान मंगवाना हैं" ममता ने रोशन अंकल को फोन किया.। बिटिया, खुद आना होगा, दुकान पर कोई लड़का नहीं है। जैसे ही ममता को पता चला की अंकल को अपनी परचून की दुकान पर लड़के की जरुरत है तो उसने छोटू की सिफारिश कर दी । छोटू अंकल का हाथ बटाने लगा था..। ममता और अंकल दोनों ने मिलकर छोटू का स्कूल में दाखिला भी करवा दिया था...।

Hindi Story by Sunita Pawar : 111124859
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