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मै ज्योंही रेल्वे प्लेटफार्म पर पहुंची,, मुझे किसी ने पीछे से आवाज लगाई,, पल भर मुड़कर देखने के बाद मुझे लगा कि यहाँ कौन मुझे आवाज देगा, सोच मै आगे बढ़ गयी, तभी लगभग दौड़ता सा एक आर पी एफ जवान मेरे सामने आ खड़ा हुआ, ओर कहने लगा आंटी मै आपको कब से आवाज दे रहा था,, मैने आपको अपने आफिस के सामने से गुजरते देखते ही आवाज दी पर आप आगे निकल गये,, फिर मेरी नजर उसके बैच पर गयी उसे देखते ही मुझे याद आया,, ओर मै तुरंत बोली अरे श्री तुम? बोला जी आंटी आपकी मदद ओर आपकी दुआ से आज मै आर पी एफ मे सब इंस्पेक्टर हुँ,, मैने मुस्कुराते हुये कहा,, नही ये तुम्हारी लगन ओर मेहनत है जो तुम आज यहाँ हो।
तब उसने जो मुझसे कहा,, आंटी आप ही ने मुझे हमेशा फीस भरने के लिये रुपये दिये है ओर आप हमेशा कहती थी कि जब भी जरुरत हो रूपये मांग लेना,, मै ये बात हमेशा सबसे शेयर करता हुँ आपकी,, ओर ऐसा कहते ही उसके साथ खड़े उसके साथी जवानो से मुखातिब हो कहा कि ये वही आंटी है जिनकी मै हमेशा बात करता हुँ,, वो लोग भी सब सम्मान भरी नजरो से मुझे देख अभिवादन करने लगे,, इतने मे ही मेरी ट्रेन आ गयी,, ओर उसने मुझे मेरा सामान उठाकर सीट तक बैठाकर मेरे पैर छु मुझसे विदा ली,,
आज उसे देखकर बहुत सुकुन मिला,, ये सोचकर कि मैने एक प्रतिभा को सींचकर उसे पौधे का रुप दे दिया है।।
-- Mala Arya