एक ख़ुशी जब हाथ में है,
तो फिर क्यों है दिल को दूजी की आस?
जब खुदा देहि रहे हैं सारी जमीन,
तो क्यों रखते है हम समंदर की प्यास?
छोटी सी आँखे रखती है दुनियाभर के नज़ारे,
तो बड़ा सा दिल क्यों होजाता हैं छोटी सी बातों पे उदास?
ख्वाइश रखते है हम की जित लेंगे हर जंग को..
पर छोटी सी हार तो आती ही नही किसीको रास?
हर दिल में छुपा है एक आम इंसान,
पर फिर भी क्यों चाहिये 'यार"...जो हो सब से खास..?
हर किसी को चाहिये नवाबी ज़िंदगी,
पर क्या दौलत नही आती जिनके हाथ,जीने की ओर कोई वजह नही होती उनके पास?
जीने के लिए कम "नही "पड़ती उम्मीदे और ख्वाइशें हमारी,
कम पद जाती है तो सिर्फ दिल की धधकने और साँस,
ज़िंदगी की अहमियत नहि है हमे,खोफ फिर भी है मौत का,
ज़िंदा इंसान तेर नहीं पाता, दुब नही पाती है लाश..
न जाने क्या खोजते हे हम?न जाने क्या चाहते है?
इंसान में इंसानियत मिलती नही,पत्थर में जारी है भगवान की तलाश,
Anv◆