ચહેરાની સુંદરતા અને ચહેરાની માસૂમિયત બંને અલગ વસ્તુ છે....હિંદી ભાષામાં એક પ્રયાસ.
किसने कहा ये जिंदगी संवार देती हे...!
उफ्फ तेरी मासूमियत हमें मार देती हे..!
निकला भी करो कभी घरसे दीदार कराने,
हरबार मुजे वो बहाने हजार देती हे !
जब भी करुं उनसे इज़हार-ए-इश्क,
वो मुस्कान हमें बहुत शानदार देती हे..!
गुफ्तगु जब जब भी करता हुं उनसे,
तब क्यु अपने कान ये दीवार देती हे..!
चाहो किसीको तुम कितनी भी सिद्दत से,
अक्सर वो ही हमें इंतजार देती हे..!
देखें नहि गुलाब कभी मेरे गुलदस्ते ने,
और वो तौहफे मुजे बार बार देती हे !