ये कोई ईतेफाक नहीं है
के दिल ने अब धड़कन सीख लिया है
मजहबी रंग मे रगती जा रही ये थोड़ी मतलबी दुनिया उस दुनिया के दस्तुर को एक नया अनजाम दिया है.
मिटाने चले है कुछ अपने ही अपने मुल्क को
लगता है कि राह सेे भटके हुए काफिर है.
लेकिन उस परवरदीगार ने अपना फरमान जारी कर दिया है और अपने फरििश्तों से सिर्फ ईतना कहां है जहान मे अमन और इन्सानीयत की शाख रखिएगा.
बुरे वक्त से जो सामना हो आपका
तो ईतेफाक रखिएगा.
~ ({मुसाफ़िर} ) ~