सोया है या मर चुका है
वो जो आंख बंद कर चुका है
जायजा तो लो उसकी सांस का कोई
जारी है या मामला सिमट चुका है
अब तो आया सैलाब ही समझो
आंख में पानी उतर चुका है
समेटना है,कोई अपना थैला देगा हमें
ख़्वाब हमारा बिखर चुका है
जो दर्द था कल तक सीने में
अपनी गजलों में उतर चुका है