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पिता का तराज़ू बाप की आँखों में वो ख़्वाब नहीं था, कि बेटी का हाथ किसी नेक इंसान के हाथ में हो, उसने तराज़ू में जब भी तौला उस लड़के को, सिर्फ उसकी कोठी, कार और बैंक-बैलेंस का भार था। चेहरे की बनावट, प्रॉपर्टी के कागजात और नौकरी का रुतबा, पिता ने बड़ी बारीकी से हर एक चीज़ को परखा, पर भूल गया वो उस तराज़ू में इंसान को रखना, भूल गया वो ये देखना कि दिल में उसके कितना है रहम और तड़पना। पूछा नहीं उसने कभी—"क्या ये इंसान तुझे इज़्ज़त देगा?" "क्या इसका परिवार तेरे आँसुओं को पोंछने का हौसला रखेगा?" चकाचौंध के पर्दे में बाप अपनी आँखें मूँद बैठा था, बेटी की आज़ादी को वो सोने के पिंजरे में बेच बैठा था। सज गई डोली, चमक उठीं वो महंगी दीवारें, मगर अंदर खामोश थी रूह, और मायूस थीं वो आँखें, पैसा तो मिल गया पिता को, पर सुकून का न मिला पता, क्योंकि रूह की परख के बिना, हर रिश्ता एक अधूरा ख़त सा है। #Samaj #Rishte #Sachai #Betiyan #FatherDaughter #GehreVichar NariShakti, Swatantrata, Sapne, Motivational
एक लड़की का आसमान किताब सी है ज़िंदगी मेरी, जिसे सब पढ़ना तो चाहते हैं, मगर मेरे अनकहे शब्दों को, कोई समझ ही नहीं पाते हैं। सुबह मेरी शुरू होती है, घर की अनगिनत जिम्मेदारियों से, रात कटती है अधूरे सपनों को, तकिये के नीचे दबा कर सोने में। मैं सिर्फ किसी की बेटी, किसी की बहन या पत्नी नहीं हूँ, मैं तो वो हूँ, जिसे खुद से ही मिलनी है, मैं वो कहानी नहीं हूँ। चूल्हे-चौके की दीवारों में, मेरा वजूद सिमट कर रह गया था, 'लोग क्या कहेंगे' के डर में, मेरा खुद का नाम खो गया था। पर अब ये उड़ान मेरी, किसी बंधन की मोहताज नहीं, अपने सपनों के लिए जीने की, मुझे किसी की इजाज़त की दरकार नहीं। अब न रुकुंगी, न झुकूँगी, मैं अब अपनी पहचान बनाऊंगी, एक लड़की हूँ मैं, अपना खुद का आसमान बनाऊंगी! #NariShakti #Swatantrata #Sapne #MeriKalam #Motivational #Swabhiman
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