चाँद उदास सा
तारे बुझे-बुझे से
आज दिन नया सा
जिंदगी अंदाज अटपटे से
दिल सुकून से खाली
बैठे हैं लुटे-लुटे से
मेरे बिन मेरे कच्चे मकां के
अरमान घुटे-घुटे से
दर्द को मैं भा गया हूँ
रास्ते गमों से सजे-सजे से
सुबह का सुरज छुपा छुपा सा
शाम के उजाले बुझें बुझे से
दूर तलक शायद कोई नहीं
पैर के निशां तमाम मिटे मिटे से
पांव में इक थकान सी है
लगता है आयें है हम कहीं से चलें चलें से