अगर होता एक खून माफ,
तो तेरे जीवन के हर दर्द को हर लेता।
अगर होता दो खून माफ,
तो हर उस आईने का क़त्ल कर देता,
जो तेरे हुस्न पर अपना हक़ जताता।
अगर होता तीन खून माफ,
तो आसमान से वो हर सितारा गिरा देता,
जिस पर तेरी नज़र ठहर जाती।
अगर होता हर खून माफ,
तो इस ज़ालिम दुनिया को ही मिटा देता,
जो हमारे इश्क़ को गुनाह समझती है।