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Nilesh Rajput

Nilesh Rajput Matrubharti Verified

@nileshrajput842gmail.com162713
(2.3m)

અજાણ્યો પત્ર - 28

बीते कुछ दिनों से मैं तुम्हारी तस्वीरो से दूर रहा हूं, जैसे कोई पंछी अपने पंखों को समेटकर आसमान से दुश्मनी मोड़ ली हो, जैसे कोई मछली बिना पानी के भी कुछ चंद लम्हे जीने लगी हो, वैसे ही मैंने भी तुम्हारी यादों से दुश्मनी मोड़ ली है, वैसे ही मैं अब तुम्हारे बिना भी कुछ चंद लम्हे जीने लगा हूं, पर तुम तो जानती हो ना, मछलियाँ पानी के बिना और पंछी आसमान के बिना सिर्फ तस्वीरों में ज़िंदा रह पाते हैं, और अब मैं भी तुम्हारी तस्वीरों में कहीं समा गया हूँ।

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कोई उसे सिर्फ़ तीन लफ़्ज़ों में ही ले गया,
और हम यूँ ही स्याहियाँ ख़त्म करते रह गए.....💔

સૂરજ ઊગે ને આથમે છે,
ચાંદ સાથે જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી....

આકાશ તારાઓથી છલકાઈ ગયું છે આજે,
અમાસ હોય કે પૂનમ જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી...

ખરી પડ્યા આજ પણ આંસુઓ નયનથી,
ખુશીઓ સાથે જાણે કોઈ લેવા દેવા નથી...

પૂછ્યું એમણે અમસ્તાં, "લખો છો ક્યાંથી?"
ખુમારી તો જોવો મારી તમે,
લખું છું પ્રેમ પર,
પણ પ્રેમ સાથે મારે કોઈ લેવા દેવા નથી...

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મારો એઠો પડેલો પ્રેમ કોણ લેશે?
આ ઊંડા પડેલા ઘાવ કોણ જરશે?

હાંફી હાંફીને ચાલે છે હવે દરેક શ્વાસ મારો,
આ ઘરડા થયેલા દિલને ટેકો કોણ કરશે?

જ્યાં જ્યાં નજર કરું ત્યાં તારો જ અક્સ દેખાય છે,
આ નબળી પડેલી દ્રષ્ટિને હવે સાજી કોણ કરશે?

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जब जब मोहब्बत की बात हुई,
ज़ुबां से सिर्फ तेरा ही नाम आया,
कमाल तो देखो जनाब-ए-वफ़ा का,
हर एक की ज़ुबां पे सिर्फ उनका ही नाम आया... 💔

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Eno ❌, Money show ✅
Girls move on kare sirf 6 din me 😅😂

"अगर कोई सरकार के खिलाफ बोले,
तो पहले उसकी पहचान देखी जाती है,
वह हिंदू है या मुसलमान?
अगर हिंदू हो, तो फिर उसकी जाति,
ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र?
और अगर वह दलित हो, जिन्हें इन चार वर्णों में जगह तक नहीं मिली,
तो उसका बोलना ही नहीं,
उसका होना तक अपराध मान लिया जाता है।"

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कभी मैंने खुद के बारे में नहीं लिखा,
नहीं लिखा उन समाज की सच्चाइयों पर,
नहीं लिखा कभी उस माँ की सूनी पड़ी गोद पर,
नहीं लिखा गरीबी में पल रहे उन बच्चों की हँसी पर,
नहीं लिखा देश के बदलते उन हालातों पर,

मैंने सिर्फ लिखा तुम्हें, तुम्हारे दिए हुए प्रेम के बारे में,
लिखा कि तुम्हारी आँखें इस जहाँ की सबसे हसीन नजरों में से एक हैं,
लिखा तुम्हारी उस खिलखिलाती हँसी पर, जिसे देखकर हम यूँ ही मुस्कुरा उठते हैं।

मैंने सिर्फ लिखा तुम्हें, चाहा तुम्हें,
और जिया भी सिर्फ तुम्हें।

शायद अब तुम समझ पाओ,
मेरे ज़हन और दिल के हर कोने में
तुम्हारे लिए कितनी मोहब्बत है।

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