✨️इतवार की धूप✨️
आलम है सुस्ताने का,
एक लंबी मीठी तान का।
ना अलार्म की कोई ज़िद है आज,
ना फ़िक्र किसी काम का।
चाय की प्याली में घुली हुई,
थोड़ी फुर्सत, थोड़ा प्यार है,
भीड़ से कट कर खुद से मिलने का,
बस यही एक इतवार है।
धूप खिड़की से झाँक कर कहती है,
"आज तो ज़रा धीरे चलो,"
सारे हफ्ते की थकान भूल कर,
अपनों के संग हो लो।