हमने जिसे अपना सुकून समझा, वही सबसे बड़ा ज़ख़्म दे गया,
जिसके नाम से जीना सीखा था, उसी ने जीने का हुनर छीन लिया।
हर वादा, हर क़सम आज भी कानों में गूंजती है,
पर वो आवाज़ें अब बस ख़ामोशी में ही सिसकती हैं।
हमने चाहा था उम्र भर का साथ, कुछ पल नहीं,
पर उसने तो हर लम्हा हमें तन्हाई का मतलब समझा दिया।
आज भी सवाल वही है— हमारी मोहब्बत कम थी या किस्मत,
क्योंकि टूट कर भी हम उसी को चाहने से रुक नहीं पाए।”
- kajal jha