मैं और मेरे अह्सास
खास
एसा भी कुछ खास नहीं लिखा हैं l
जानेमन को दास नहीं लिखा हैं ll
खुद को और अपनों के लिए किया l
आम नृत्य को रास नहीं लिखा हैं ll
जी में आया वो कविता में लिखा l
शब्द लिखे एहसास नहीं लिखा हैं ll
आगे कुआँ पीछे खाई है इस लिए l
सत्य को आभास नहीं लिखा हैं ll
उजालों को अपनी ओर लाना है तो l
अंधेरे को आसपास नहीं लिखा हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह