तामीरी फितरत वफा है दे रहा हूँ इमतेहान गर फिर भी,
वो सुकून-ए-दिल है और मुझ से बद-गुमान फिर भी,
फिर भी, ये दिल के अरमान हैं जुदाई का गम फिर भी।
छुपता हूँ मगर छुपता नहीं दर्द-ए-निहांयत फिर भी,
निगाह-ए-याद हो जाती है दिल की तर्जुमान फिर भी,
फिर भी, आशना-ए-गम से है ये दिल ए खम फिर भी।
गम-ए-वामन्दगी से बे-नियाज़-ए-होश में बैठा हूँ,
चली आती है आवाज़-ए-दारा-ए-कारवाँ फिर भी,
फिर भी, सुनाते हैं कहानियाँ दिल-ए-नादान फिर भी।
ख़्वाब-ए-तबस्सुम है कुल्जुम-ए-ईष्काना फिर भी,
आरास्ता-ओ-बेसाहिल में है कुछ कहानियाँ फिर भी,
फिर भी, जवाब-ए-बज़्म-ए-रुख पर ले जान फिर भी।
जाम-ए-नसीम-ए-रूबाई रोशनी कम है फिर भी,
मिट्टी में मिलता है लेकिन रंग-ए-गुलाब फिर भी,
फिर भी, जंबा-ए-समंदर-ए सितम शान फिर भी।
निगाहें मिलती हैं लेकिन मोहब्बत कम है फिर भी,
लफज ए शनाखत जलते हैं लेकिन अरमान फिर भी,
फिर भी, चांदनी रातों में है एक जुबान फिर भी।
लफ़्ज़-ए-मसरूफ़ियत दुआए एक बहाना फिर भी,
हाला-ए-आरजू निकलते हैं, वही अफ़साना फिर भी,
फिर भी, सुनते हैं मर्जी तहाफुज-ए-पहचान फिर भी।
हया ए सफर औ हिदायत आसरा फिर भी,
बारगाह-ए-हया-मुददई नामिले गुमान फिर भी,
फिर भी, दास्तान-ए-फलक हर एक जुबां फिर भी।
आरज़ू-ए-मोहब्बत में है इक जज्बा फिर भी,
हदूद़-ए-तहययुन है बाजार, इक नशा फिर भी,
फिर भी, ताजिरात-ए-अदब, बस उदासां फिर भी।
तनहाई सरब-ए-फिकर या अफ़साना फिर भी,
दिल के कोने में है एक पुरानी कहानी फिर भी,
फिर भी, याद-ए-माज़ी से दिल ए तकाजा फिर भी।
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सप्रेम-स्वरचित मनोरजंन मनोरथपूर्ण भाव सहित
केवल चितंन योग्य, मय आंनन्द,अकथ बस, नेपथ्य में बहुत कुछ सामाजिक,आर्थिक और राजनैतिक परिदृश्य के मांनिद ,
© जुगल किशोर शर्मा-बीकानेर-9414416705