चार सलेक्ट या अस्सी राम कविता विश्वास
देख सौ सौ भले ठिके, याडण्डा जेल दिवाय
माया सबमें यू रमे राम नाम अब कहें हे राम
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नयनाभिराम अभिराम है रामे रमे बलराम
समय समय का फेर कुण न्यायी संतराम
ढोर ढपे शंखराज कुर्सी योजन विराजमान
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फिलम सितारा तंग अंग घड़ि दोय आनंद
देख तु इस इस और कुछ मनतपे मकरंद
सांप जहर उतारा दे ऐल्विस मुनव्वर वृन्द
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काफूर कफन खददर चटका यक सफेदी रंग
देख पेपर मुहखुला हल्का नकल खेल उद्गम
सरवरडाउन साल्डएन्सर कुजी कड़क छुसरगम
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मुहबत का वास चहुदिस, दुर्बल कुमारग हरास
पश्चिम दक्षिण दोउ दिश, सनातन सरग उजास
बड़ें कमीने लगते रहे, सस्ते सबूत के वास्ते
चलो अच्छा रहा मुंतजिर, खदूद जोचुने रास्ते
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ए दौर मुहालका, यु रहा, जजबाती अलगोर
लुकिया छुपिया मै फिरू, रंग लगाती डोर
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भरी दुपहरी सांझ कहॅूं सांझ कहू में भोर
मज्जन मेरा साहिबा, रिस्वत कमीशन लोर
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यारी मेरी यार की, ढूढयार एक लगाम
ना समझी इण जन्म री, अपना लेवे राम
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राम कहॅूं, सियाराम जपू मुख सू कहियों ना जाय
जो जस पावे, तो तजे, कलयुग भवतारण बतलाय
नुगरा मिनख, कुरकुरी हताया, चाटूकार चहुओर
कमीशनखोरी रिश्वत निचोरी, मुफत री चटूकोर
सही तो कहा है, साकि लुक छिप के पीओ
शराब, महफिल असरार, नकदी माल लिओं
दफतर ए दाखिल गालिब मुस्कुरादे बालिग
सफर ए नादान कमीशन बचाके जरूर गिनों
ये मुगालता झक सफेद बहाना है
कमीशन जरूरी कुर्सीया जमाना है