Hindi Quote in Poem by Ruchi Dixit

Poem quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

नही लगता बिसराने मे समय मुझे भी ,
अगर ! खोजती न आत्मा मे संबन्ध जो
तुमसे |
मिले न हो बेशक मगर होगा ! यह
विश्वास की प्रीत स्वतः जो बँध
गई है |
नही पकड़ा है मैने कुछ भी सिवाय
इस बात के कि मै और तुम अलग
नही है | नही जानती हूँ बेशक !
जुड़ाव की वो कड़ी मगर जब सोचती
हूँ तुम्हे !
अकारण हृदय का पीड़ा से भर
जाना | जिसकी तुलना अबतक
जीवन के किसी पन्ने से नही की जा सकी है |
नही लगता अभी तक की पीड़ा भी मरती है ,
जिसे सुना था अब तक |
ऐसा नही है की बिसरा न सकूँ मगर !
जाने कौन बैठा है भीतर नही देता बिसराने,
जाने क्या तलाश रहा है इस पीड़ा मे |
मैने कुछ पकड़कर नही रखा है सिवाय
इसके की कि तुम मेरा सदियों का इंतजार
और मै तुम्हारी तपस्या हूँ |
आखिर मै क्या हूँ ? यही प्रश्न को गठियाये
तुम्हारी प्रतीक्षा रहती है |
हर भाव तुमसे जोड़ बैठी हूँ ,
किसी को झाँकने की भी इजाजत नही है |
मुझे भावना का भी मोह नही आखिर कबतक
शेष रहेगी नही जानती |
पकड़कर नही रखा मैने सिवाय इसके कि कुछ
है इसके भीतर शायद मै हूँ | आखिर मै कौन हूँ
यही प्रश्न तो तुममे उलझाये रखता है मुझे |
याद आता है वह एक क्षण जब तुम्हारी प्रीत
देह मोह को लांघकर बस अनंत मोह के वश
हो गई वह क्षण अव्यक्त है , और उस क्षण के
स्पर्श से कोशो दूर हूँ |
तुम्हारा मुझसे दूर जाना मेरा परिवर्तन, पतन कैसे
हो सकता है | तुम जो पतित को पावन करने वाले
हो | यही मेरी पीड़ा का आधार है | मगर मैने पकड़कर
नही रखा सिवाय इसके कि मेरे और तुम्हारे
अतिरिक्त शेष कुछ भी नही है |

Hindi Poem by Ruchi Dixit : 111840724
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now