II शुभोदयम् II
धर्मे तत्परता मुखे मधुरता दाने समुत्साहता
मित्रेऽवञ्चकता गुरौ विनयता चित्तेऽति गम्भीरता।
आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञानता
रूपे सुन्दरता शिवे भजनता सत्स्वेव संदृश्यते ।।
भावार्थ
धर्म में तत्परता, मुंह में मीठे बोल, दान देने का अत्यन्त उत्साह होना, मित्रों के लिए प्यार की भावना, गुरु के प्रति श्रद्धा और नम्रता, मन में समुद्र के समान गंभीरता, आचरण में शुद्धि और प्रेम गुणों में सबकी भलाई की कल्पना, शास्त्रों का ज्ञाता और प्रचारक रूप में सुन्दरता और मुख पर हंसी ।
यह सब बातें केवल अच्छे लोगों में ही देखने को मिलती हैं।