ये अमृत महोत्सव
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हम खुशनसीब हैं
कि आज ये अमृत महोत्सव का पल
हमारे आपके जीवन में आया,
हम सबको को गर्वित होने का
सुनहरा अवसर है आया।
चलिए मैं भी आपको बधाइयां देता हूँ,
आपकी बधाइयां स्वीकार कर लेता हूँ,
परंतु निवेदन के साथ कहता हूँ
पागल हूँ शायद इसीलिये बकता हूँ।
स्वीकार कीजिये या नहीं
मैं तो अपनी बात रखता हूँ।
कितने लोग हैं जो
इस आजादी का मतलब समझते हैं,
जाने अनजाने रणबांकुरों को याद करते हैं,
उनके संघर्षों, बलिदानों को नमन करते हैं
श्रद्धा के दो पुष्प अर्पित करते हैं?
मानता हूँ कि आप सब ऐसा जरूर करते हैं।
फिर तो बड़ा अफसोस भी होता होगा
जब आजाद भारत का नागरिक
हम खुद को कहते होंगे,
क्योंकि लूटमार, अनाचार, अत्याचार
भ्रष्टाचार, देशद्रोह और
देश को नीचा दिखाने ही नहीं
देश को तोड़ने का षडयंत्र भी
कुछ लोग जब करते हैं,
शांति और सौहार्द बिगाड़ते हैं
गंगा जमुनी तहजीब में तेजाब डालते हैं,
मुंँह में राम बगल में छुरी रखते हैं
गिरगिट की तरह रंग बदलते हैं।
तब आज की जरुरत है
मौन तोड़कर आगे बढ़िए
देश से पहले आप अपने बारे में ही सोचिए,
आप खुशहाल रहेंगे तो
देश स्वतः खुशहाल होगा,
जब देश खुश हाल होगा
तभी देश का भाल ऊंचा होता रहेगा।
आजादी का वास्तविक आनंद तभी आयेगा
आजादी का आने वाला सौवां साल
भारत की यशोगाथा पूरी दुनिया में सुनाएगा
तब भारत भारतवर्ष बन
झूमेगा, नाचेगा,गायेगा
आजादी का असली आनंद तभी आयेगा।
सुधीर श्रीवास्तव
गोण्डा, उ.प्र.
8115285921
©मौलिक स्वरचित