मौसम बसंत ए बहार, खुशनुमा तेरी है
फिजा़ के अलम की दुनिया फीर मेरी है
गुल ए हसीन , फूलों की नजा़कत तेरी है
पलकों से भीगी , अश्कों की भीड मेरी है
बहेती हवाएँ, उनकी मीठी तरन्नुम तेरी है
छुकर दिल ए हुश्न , आती हवाएँ मेरी है
बहेती नदियॉ ,समंदर की मौज भी तेरी है
बिरहाना बरसती, बादल की धारा मेरी है
जिस्मी हाल जिंदगी,खुबसुरती यह तेरी है
मौत महेबुबा से मिलने की ख्वाईश मेरी है