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કુદરત અને સેક્સ એડ્યુકેશન... આ એક અદ્ભુત વિષય છે... કુદરત તરફ થી દેહ પ્રાપ્ત થાય છે.. અને દેહ નો સ્વભાવિક ધર્મ છે વિકસિત થવું... આ વિકાસ માટે કુદરતે કોઈ પણ જીવ માં મૂળભૂત વૃતિઓ આપી છે.. (૧) નિદ્રા (૨) ભૂખ તરસ (૩) સક્રિયતા અને સુરક્ષા (૪) ભય - પીડા (૫) સેક્સ... આ ૫ કુદરતી વૃત્તિઓ થી જ કોઈ પણ જીવ નો વિકાસ અને પોષણ સંભવ છે. નિદ્રા, ભોજન ,પાણી, સક્રિય શરીર, સુરક્ષિત વાતાવરણ ,ભય અને પીડા અંગે સભાનતા અને રક્ષા રોજે રોજ ના જીવન માં ખૂબ આવશ્યક છે... અને એટલી જ આવશ્યક છે સેક્સ ની લાગણી... સેક્સની વૃત્તિઓ પ્રેમ, સુખની લાગણીઓ અને મનુષ્ય માં રહેલી રચનાત્મક સર્જન ક્ષમતાઓ સાથે જોડાયેલ છે.
समय का गणित ----------------- आज का समय प्रश्न का ,और जिज्ञासा का समय है। बुद्धिमान लोग समय के हिसाब से निर्णय लेते है और समय का गणित निर्णय लेने की क्षमता का गणित है। वह व्यक्ति जो निष्कर्ष पर पहुंचे वहीं निर्णय ले सकता है। आज के हमारे विचार,भाव और चिंतन प्रश्न रहित है। जहां प्रश्न नहीं होगा, वहां निर्णय नहीं होगा, और जहाँ निर्णय नहीं होगा वहां प्रगति कहा से होगी? इसे दूसरे दृष्टि से देखे... एक विद्यार्थी को लगता है कि वह पढ़ाई में और खेलकूद में दूसरों से कमजोर है। वह इस चीज को सोचता रहता है और उसके दिमाग की बनाई हुई परिस्थितियों में फंस जाता है। इसे हम नकारात्मकता का "लूप" कहेंगे। अब इस लूप से निकलने का सबसे आसान तरीका प्रश्न है। सिर्फ "?" लगाना है , में पढ़ाई में और खेलकूद में कमजोर क्यों हूँ? और उस विद्यार्थी का चिंतन सक्रिय हो जाएगा और फिर प्रश्न के ऊपर प्रश्न करना है , क्या इसे बेहतर बनाने का कोई रास्ता है? किसी भी समस्या या उलझन से त्वरित निकलने का मार्ग प्रश्न है। अष्टावक्र गीता, भगवद गीता और उपनिषदों की शुरुआत से ले कर विज्ञान की उपलब्धियों का चिंतन भी प्रश्न से ही निकला है। ज्योतिष के दृष्टिकोण से प्रश्न कुंडली और टैरो जैसी विद्याओं का आविष्कार भी प्रश्न के कारण ही हुआ। जिसके सारे प्रश्न समाप्त हो गए वह या तो ज्ञानी हो गया, या तो मूढ़। आप के पास कुछ ऐसे प्रश्न हो जो आप के चिंतन को सक्रिय करे, आप को उत्साह से भर दे, उसका उत्तर मिलने पर आप को स्पष्टता और प्रसन्नता हो तो वह प्रश्न ही उपलब्धि और प्रगति का द्वार है। हर एक समस्या को प्रश्न की तरह देखे और उसका उत्तर खोजे। आप देखेंगे कि इस खेल में आपका अंतर विकसित होगा।
प्रश्न : क्या जन्म की तारीख में अच्छे अंक आने से संघर्ष से मुक्ति मिलती है? उत्तर : अंकशास्त्र के अंक विभिन्न ग्रहों से जुड़े हुए है ,और ग्रह जीवन के विभिन्न आयामों से जुड़े है। जो भी लोग जीवन को समझते है वह जानते है कि जो वस्तु या व्यक्ति जीवन में आते है वह अच्छे और बुरे दोनों अनुभव देते है , यानी कि ग्रह के जो भी कारकत्व है वह बुरे और अच्छे दोनों परिणाम देते है। जब माता और पिता अजन्मे बच्चे के लिए सर्वश्रेष्ठ जन्म तारीख चुनना चाहते है तो उसके पीछे यह माता पिता की भावना और इच्छा होती है कि जो संघर्ष और कठिनाइयाँ उन्होंने बर्दास्त की है,वह संघर्ष उन बच्चों को न भोगना पड़े। कभी कभी यह भी हो सकता है कि बच्चों को मिला हुआ आराम ही उनके लिए संघर्ष हो जाए। बच्चा जिस भी तारीख को पैदा हुआ है, उसको, परिवार,शिक्षा,धर्म,समाज,सरकार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति , अर्थव्यवस्था सब कुछ प्रभावित करता है, जिस भी वातावरण में वह पलता है, उसके अनुभव उसके प्रारब्ध का निर्माण करते है। यह बात न भूले। हा जन्म तारीख में अच्छे योग बनने से उसके गुणों के बारे में जान कर उसको उचित मार्ग पर लाया जा सकता है। और यह भी संभव है कि बुरे अंक भी सावधानी के लिए तैयार कर सकते है तो फिर चिंता क्यों? अंकशास्त्री आपको बच्चे की जन्म तारीख देते हुए , अंक ४, अंक ८ ,अंक २ के पुनरावर्तन, अंक १,८ के योग , अंक २,८,६ के योग से बचने को कहेंगे। अब सर्जरी से जो बच्चे पैदा होंगे वह इस संभावनाओं से बचे रह सकते है।
प्रश्न : बहुत लोगो का यह प्रश्न है ,की काम काज में बहुत बार ऑर्डर या सर्विस रिक्वेस्ट मिलती है, एडवांस भी मिलता है परन्तु अंतिम वक्त में दिया गया ऑर्डर या सर्विस रिक्वेस्ट कैंसल या रद्द हो जाती है, तो क्या करे? ----------------------------------- उत्तर : यह प्रश्न पिछले ६ महीनों में दस लोगों ने पूछा है" काम आता है और कैंसल हो जाता है। कभी कभी लिया हुआ एडवांस पूरा वापस करना पड़ता है, तो सब से पहले इसका अंक ज्योतिषीय कारण देखते है। अगर आप की अंक कुंडली में अंक ४,८ की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो और वह एक बार, तीन बार ,या पांच बार अंक कुंडली में रिपीट होते हो, या अंक ५ का दो या दो से ज्यादा बार पुनरावर्तन हो, तो व्यवसाय में दिक्कते आती है। अंक ९ की फ्रिक्वेन्सी में रिपीटेशन हो, तो भी शुरू किए काम पूर्ण नहीं होते। ज्योतिष में राहु की महादशा , अंतर्दशा या प्रत्यंतर दशा में यह हो सकता है परन्तु ज्योतिष में ग्रहों के प्रभावित घर एवं नक्षत्र ,उपनक्षत्र भी देखने पड़ते है। अब व्यवहारिक तौर पर इस समस्या को देखते है। कुछ चीजें समझे, ---------------- (१) केवल इंक्वायरी आना फाइनल डिल नहीं होती, जब तक क्लाइट के मन में ऑर्डर के लिए पूरा विश्वास और रजामंदी न हो तो ऑर्डर इंक्वायरी लेवल तक ही सीमित है। (२) अगर आप बड़ी चीजों में सेल्स करते हो तो आप एक Mutual understanding Sheet बना सकते है, जिसमें एडवांस मिलने और उसको वापस करने की शर्ते लिखे। और वापस करने की वाजिब शर्ते लिखे। एडवांस लेते वक्त ग्राहक के हस्ताक्षर ले। आप नो रिफंड पॉलिसी या पार्ट पेमेंट पॉलिसी के बारे में भी लिख सकते है। अपने ग्राहक को शर्ते समझाए। और यह समझाए कि यह आपके और उसके दोनों के हित के लिए है। (३) बहुत से किस्सों में , ग्राहक का कोई अन्य कारण हो, कोई मजबूरी हो, या उसे कोई बेहतर ऑफर मिली हो तो यह सभी कारणों का स्वीकार करे। (४) आप यदि सर्विस देते हो तो अपॉइंटमेंट की बुकिंग सिस्टम और ५०% बुकिंग फीस एडवांस के नियम बनाए। जिसकी भी आप से सर्विस लेने की इच्छा होगी वह ५०% एडवांस पेमेंट कर देंगे । क्लाइंट के साथ नियम स्पष्ट रखें।
લાઈક્સ કે વ્યૂઝ માટે નહી... તમને પોતાને મજા આવે છે એટલે લખો.. મજા આવશે તો લોકો વાંચે છે કે નહીં તેની ફિકર ભી નહી રહે.... તમે લેખક તરીકે મજા લો.. બાકી બધું થઈ પડશે આપો આપ
जीवन को देखने की तीन दृष्टि। ------------------------- (१) *मनुष्य सामाजिक है।* : यह दृष्टि मनुष्य को समाज की शिक्षा, धर्म, ज्ञाती,उच्च - निच,परंपरा, रूढ़ि वाद, अच्छा बुरा, लोभ, प्रभाव ,अधिकार से जोड़ती है। यह दृष्टि के अनुसार समाज में प्रभाव, धन या आप की प्रतिष्ठा आप की सफलता का मापदंड है, और इसी माप दंड के आधार पर दुनिया आप का मूल्यांकन करती है। और इसी से आप की पहचान बनती है। (२) *मनुष्य आयुष्य का एक निश्चित समय* है। - यह दृष्टि सामाजिक दृष्टिकोण से व्यापक है। जन्म और मृत्यु के बीच का समय ही जीवन है , तो मनुष्य एक आयुष्य की संभावना है, वह उसकी जाति, धर्म, शिक्षा और अधिकार से बहुत ऊपर है, और इस दृष्टि के आधार पर उसका मूल्यांकन उसके आयुष्य से प्राप्त समय का उसने किस तरीके से प्रयोग किया है उस पर है, उसका समय कैसे व्यतीत होता है इस पर उसके जीवन की गुणवत्ता है। वह चाहे तो किसी भी परिस्थिति में प्रसन्न रह सकता है। जितना प्रसन्न रहेगा, उसका समय उतना ही गुणवत्ता युक्त रहेगा। (३) *मनुष्य जीवसृष्टि की असीम संभावनाओं में से एक संभावना है।* - यह एक बहुत व्यापक दृष्टि है, इस ब्रह्मांड में करोड़ो साल पहले जीवन की संभावना का उद्भव हुआ। आज हम उसी जीवन की संभावनाओं को मंगल और चंद्र पर ढूंढ रहे है। उसी जीवन की संभावनाओं से अमीबा से ले कर बैक्टीरिया और वायरस तक का जन्म हुआ। मनुष्य भी इस जीवन या जीवसृष्टि की एक संभावना ही तो है। मतलब मनुष्य सिर्फ सामाजिक और आयुष्य का एक छोटा सा भाग न हो कर उसी जीवन की संभावना या जीवसृष्टि का *_विस्तरण_* है। इस दृष्टिकोण से मनुष्य , पशु पक्षी,कीटक और पतंगा सब एक ही *जीवन शृंखला* के अंश है और जीवन के उस प्रवाह का जतन कर रहे है जो करोड़ों वर्षों से अस्तित्व में है , जिसके कारण ब्रह्मांड का जन्म हुआ था। इसी जीव सृष्टि के अंश को ब्रम्ह कहा गया है, जो सभी में एक समान रूप से विद्यमान है। जब यह एहसास हो जाता है तो जीवन - जीवन में भेद का नाश होता है। फिर मनुष्य सिर्फ आयुष्य यानी जन्म और मृत्यु नहीं रहता क्योंकि जब तक जीवन है उसे ज्ञात है कि जन्म और मृत्यु के चक्र की संभावना चलती रहेगी। जो इस जीवन की संभावना में स्थित हो जाता है वह विश्वरूप हो जाता है।
प्रश्न : रत्नों का महत्व क्या है? रत्नों से भाग्य बदलता है? उत्तर: रत्नों का उपयोग अंगूठी और आभूषण की सुंदरता बढ़ाने के लिए होता है। रत्नों को ग्रहों और उसके कारक के साथ जोड़ा गया है। रत्नों से आपका व्यक्तित्व और आत्मविश्वास निखरता है ऐसा प्रयोगात्मक विश्लेषण से पता चलता है। यदि कोई ज्योतिषी आपको रत्न का सुझाव करता है और उसे पहनने के बाद यदि आप के आंतरिक आत्मविश्वास और व्यक्तित्व को बाह्य रूप से निखार मिलता है एवं आप की प्रसन्नता,और सुंदरता बढ़ती है तो ही वह रत्न पहने। यह भी याद रखे, इंसान के अलावा, कुदरत का कोई भी जीव रत्न या आभूषण नहीं पहनता। उनके पास भी जीवन है, उनको भूख,प्यास,नींद,भय,पीड़ा, सेक्स की इच्छा और असुरक्षा उतनी ही महसूस होती है जितनी इंसान को, परन्तु इंसान के पास एक चीज है, जो इन जीवों के पास नहीं है, वह है समाज ,और सामाजिक इच्छाए मनुष्य को ही है, उसे आत्मविश्वास, प्रभाव,भाषा,तर्क , ज्ञान,सम्मान,संपति और प्रगति की चाह है। और यदि रत्न पहनने से यह सारी इच्छाओं की पूर्ति में सहायता मिलती है तो रत्न जरूर पहनना चाहिए।
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