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નારી શું ઈચ્છે છે? અને નર શું વિચારે છે? આ પ્રશ્ન જો બન્ને માંથી એક ને વારંવાર થયા કરે તો સમજવું સંબંધ રિબોન્ડિંગ માંગે છે.
Astrology is Real or Fake? Astrology is a wisdom that connects Astronomy with Individual’s Life through Birth chart prepared According to Birth place Longitude and Latitude,Birth Time and Birth Date. Astronomy is Real and Scientific… but That Astronomy is Connected with Individual ‘s life through Imagination of Traits of Zodiac signs, Nakshatras and Planets. Eg: the shape of Leo sign is like lion.. and it governs the Traits of Authority. This is an imagination. So Astrology is a Combination of Science as well as Imagination. The Astronomical Effects can be proven through Logic, Reason and Evidences but Astrological effects are Subjective, personalised and Based on Individual’s Own beliefs or thinking. So, Science+ Art = Wisdom Various Other Subjects are also connected with Astrology like Mathematics, Phycology and Panchangam .. which makes the subject Comprehensive and detail oriented. There are many Parts and Systems of Astrology, like Madical Astrology,Career Astrology, Relationship Astrology,Mundane Astrology.. And Systems like Traditional parashar Astrology,Brighu Nadi System, Lal Kitab,Kp System,Asthakvarga.. The core purpose of Astrology is to Spread Awareness and guidance about Individual’s Life.. and Predict Future Aspects of Individual’s Life. In total Astrology can Guide both the Aspects of human Life Reality and Human Luck.
दिल्ली की एक सर्द रात थी, अपनी २५ मंजिल की ऑफिस के एक केबिन में ४० वर्षीय आर्यन अकेला बैठा था। उसका सबसे भरोसेमंद पार्टनर, विक्रम, रातों-रात कंपनी के डेटा और इन्वेस्टर्स को लेकर प्रतिद्वंदी कंपनी से जा मिला था। आर्यन के सामने बैंक की किश्तें, कर्मचारियों का भविष्य और एक टूटता करियर था। तभी वहाँ शौर्य मेहता आए—एक ऐसे मेंटर जिनका सम्मान पूरा बिज़नेस जगत करता था। शौर्य ने आर्यन के बिखरे चेहरे को देखा और कहा, "आर्यन, तुम इसलिए नहीं टूटे क्योंकि बिज़नेस डूब गया, तुम इसलिए टूटे क्योंकि तुम्हारे पास कोई आंतरिक 'जीपीएस' नहीं है। जब तक १० प्राचीन नीतियां तुम्हारी अंतरात्मा नहीं बनेंगी, तुम दुनिया के थपेड़ों से ऐसे ही डगमगाते रहोगे।" “आर्यन, तुम स्मार्ट हो, मेहनती हो, पर तुम एक चीज़ में कमजोर हो।” आर्यन चौंका, “किस चीज़ में, सर?” शौर्य बोला, “तुम्हारा दिल अच्छा है, पर तुम्हारा दिल अभी नीति शास्त्र से नहीं जुड़ा है। तुम्हारे निर्णय कभी सिर्फ़ भावना से निकलते हैं, कभी सिर्फ़ डर से। तुम्हें ऐसा अंतर्मन चाहिए जो हर स्थिति में संतुलित फैसला कराए—धर्म भी बचे, काम भी हो, और चरित्र भी खड़ा रहे।” " मेरी बात को ध्यान से सुनो; * विदुर हमारा विवेक हैं। * चाणक्य हमारी बुद्धि हैं। * शुक्र हमारी व्यवस्था हैं। * कणिक हमारी आत्मरक्षा हैं।" इन सभी के विचार नीति शास्त्र के चार आधार है, जो अब मेरी अंतर आत्मा की आवाज है।“मैंने इन्हें सिर्फ़ नैतिकता नहीं, व्यावहारिकता, जीवन-प्रबंधन और रणनीति के साथ जोड़ा है। यही इन्हें जीवित बनाता है।” शौर्य उसे शहर से दूर एक रिट्रीट पर ले गए और उसे १० सूत्र दिए । (१) सत्य का मार्ग: हमेशा स्वाभाविक धर्म पर चलें; सफलता के लिए व्यावहारिक बनें और विनाशकारी प्रवृत्तियों को जड़ से खत्म करें। (२)आत्म-नियंत्रण: इंद्रियों पर काबू ही असली शक्ति है; अपनी कमजोरियों को कभी सार्वजनिक न करें। (३)विश्वास की सीमा: जिसने एक बार भरोसा तोड़ा, उस पर पुनः विश्वास न करें; अपनी योजनाओं को गुप्त रखें। (४)धैर्य: संकट में स्थिर रहें; विद्वानों की संगति करें और सामर्थ्य विकसित कर सही अवसर पर ही प्रहार करें। (५) वाणी और ज्ञान: मीठा बोलें क्योंकि विद्या से भरी मधुर वाणी ही वह धन है जिसे कोई चुरा नहीं सकता; गलत आचरण पर अनुशासन अनिवार्य है। (६)समय और लालच: लालच से बचें; जो समय का आदर नहीं करता, समय उसे नष्ट कर देता है। (७)कर्तव्य और परामर्श: फल की चिंता किए बिना कर्तव्य करें और महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अनुभवी मार्गदर्शकों की सलाह लें। (८)क्षमा और सम्मान: शक्तिशाली होकर भी क्षमा करना सबसे बड़ा गुण है; अपने लोगों की उन्नति में ही अपना सुख समझें। (९) अनुशासन और मौन: मूर्खों की संगति से बचें; अनुशासन ही सफलता की पहली सीढ़ी है और योजना सिद्ध होने तक 'मौन' सबसे बड़ी ढाल है। (१०)कृतज्ञता और सजगता: मदद करने वालों के प्रति आभारी रहें, पर हमेशा सजग रहें क्योंकि बाधा किसी भी रूप में आ सकती है। शौर्य मेहता ने यह १० उद्धरण आर्यन को 'नीति-शास्त्र' के सार के रूप में दिए। और इसके सही परीक्षण के लिए तीन प्रश्न दिए। यह वे प्रश्न थे, जो नीतिशास्त्र को अंतर आत्मा के साथ जोड़ने में सहायक थे, (१) क्या यह रास्ता मेरे स्वभाव और कर्तव्य से जुड़ा है? (२) क्या यह रास्ता मेरा डर और लालच बोल रहा है? (३)क्या यह रास्ता मेरे चरित्र को ऊँचा उठाएगा?" आर्यन ने शौर्य के दिए तीन सवालों को अपनी सोच और अंतरात्मा बना लिया और अपनी इसी अंतरात्मा के अनुसार चलने लगा। कंपनी को फिर से खड़ा करने के लिए आर्यन को एक बड़े प्रोजेक्ट की सख्त जरूरत थी। मीडियेटर ने शर्त रखी कि आर्यन को पिछली रिपोर्ट्स के कुछ आंकड़ों में झूठ बोलना होगा। टीम ने कहा, "सर, थोड़ा 'एडजस्ट' कर लेते हैं।" पर आर्यन ने नीति के सूत्र 1 और 5 को याद किया। उसने मीडियेटर को साफ कहा, "मैं प्रोजेक्ट खो सकता हूँ, पर साख नहीं।" नया इन्वेस्टर उसकी निडर ईमानदारी से इतना प्रभावित हुआ कि उसने न केवल काम दिया, बल्कि आर्यन को अपना 'वफादार पार्टनर' घोषित कर दिया। एक प्रतिद्वंदी कंपनी ने आर्यन के खिलाफ बाज़ार में अफवाहें उड़ानी शुरू कीं। आर्यन गुस्से में तुरंत जवाब देना चाहता था। तब अंतरात्मा ने उसे नीति के सूत्र 2, 3 और 6 समझाए। आर्यन ने बाहर चुप्पी साध ली और गुप्त रूप से अपनी नई टेक्नोलॉजी पर काम किया। जब सही समय आया, तो उसने ऐसा प्रोडक्ट लॉन्च किया कि प्रतिद्वंदी के दावे खुद-ब-खुद हवा हो गए। उसने सीखा कि हर लड़ाई शोर मचाकर नहीं, सही समय पर सही चाल से जीती जाती है। जैसे ही सफलता मिली, आर्यन का व्यवहार तानाशाह जैसा होने लगा। वह किसी की सलाह नहीं सुनता था। अच्छे मैनेजर नौकरी छोड़ने लगे। तब उसे उसके जीपीएस ने नीति के सूत्र 7, 8 और 9 का पाठ पढ़ाया गया। आर्यन ने अपना 'अहंकार' त्याग कर एक 'लीडरशिप बोर्ड' बनाया और अपनी टीम को 'पार्टनर्स' की तरह सम्मान दिया। उसने सीखा कि बड़ा लीडर वह है जो खुद से ज़्यादा काबिल लोगों को साथ जोड़ सके। धोखेबाज विक्रम मुसीबत में पड़कर वापस आया और गिड़गिड़ाने लगा। आर्यन का मन पिघलने लगा। तब दिल की आवाज ने उसे नीति के सूत्र 3, 4 और 10 याद दिलाए। आर्यन ने विक्रम की आर्थिक मदद तो की, लेकिन उसे अपनी कंपनी और प्रोफेशनल सर्कल से हमेशा के लिए बाहर रखा। उसने सीखा कि क्षमा दिल के लिए है, पर भरोसा दिमाग की चीज़ है। १० साल बीत गए। आर्यन अब केवल एक सफल बिज़नेसमैन नहीं, एक 'नीतिवान' व्यक्तित्व था। शौर्य मेहता अब रिटायर हो चुके थे, लेकिन आर्यन के हर फैसले में उनकी आवाज़ गूँजती थी। एक दिन, एक युवा एंटरप्रेन्योर आर्यन के पास सलाह लेने आया। आर्यन ने उसे कोई जादुई समाधान नहीं दिया, बल्कि वही १० सूत्र दिए और कहा, "सच्चा गुरु तुम्हें समाधान नहीं देता, वह तुम्हारे भीतर वह प्रक्रिया को (Process) जन्म देता है जिससे तुम खुद सत्य को खोज सको।
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