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yeash shah

yeash shah Matrubharti Verified

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Sunday Motivation
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What is Your one Peak Positive Quality?

9 Positive & Powerful Qualities That Can help You to thrive in Life.
*1. Unity*
*2. Peace*
*3. Spontaneity*
*4. Focus*
*5. Creativity*
*6. Clarity*
*7. Passion*
*8. Enthusiasm*
*9. Curiosity*

Understand as if You are one Quality among these 9..
Write That One Quality, and Write 5 ways to improve that Quality in Your life.
For Example;
I look myself as If I am Peace.
And I will write 5 practical ways to improve myself as Peace.

These Practical task will motivate you and give You practical Insights.

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अंकशास्त्र और सांख्य दर्शन
वर्तमान क्षण ही जीवन है... शून्य (०) है।
१ से ९ होने का भाव ही भूतकाल और भविष्यकाल है... यही समय का बंधन है।
आंतरिक उथल-पुथल अहंकार द्वारा पकड़कर रखे गए भावों का स्मरण है। हम स्वयं १, २, ३, ४, ५, ६, ७, ८, ९ तक जाते हैं...
(१) अधिकार, वर्चस्व - सूर्य
(२) चिंता, निराशा, देखभाल - चंद्रमा
(३) अपमान, सम्मान - गुरु
(४) भ्रम, योजना - राहु
(५) दोषपूर्ण वाणी, मित्रता - बुध
(६) शोषण, दरिद्रता, संपत्ति - शुक्र
(७) अति अभाव, तृप्ति - लगाव, अलगाव - केतु
(८) लोभ, संघर्ष, सफलता, प्रगति - शनि
(९) क्रोध, व्याकुलता, बल, सुरक्षा - मंगल
इत्यादि 'मैं', 'मेरा' और 'मेरे' रूपी अहम् से जुड़ा हुआ भाव-विश्व है...
इस भाव-विश्व के साथ अहंकार के ० (शून्य) होने से ही वर्तमान क्षण में जिया जाता है।
अहम् से जुड़े भाव-विश्व का दर्पण समय है... इसीलिए यह भाव-विश्व समय की गति को धीमी या तीव्र करता है।
जब तक १ से ९ होने की अनुभूति रहेगी, तब तक (जीवन में) उथल-पुथल बनी रहेगी।

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एक बुद्धिमान व्यापारी का प्रश्न।
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प्रश्न : १२ साल से जो बिज़नेस किया और पिछले ८ साल से जो सफल हो रहा था, वह अचानक ठीक नहीं चल रहा, अब ऑफिस जाने का मन कम हो रहा है, स्टाफ की सेलेरी देना मुश्किल हो गया है, कभी कभी पूरा दिन खाली होता है ,१ पैसे की कमाई देखने को नहीं। किसी ने धंधा बाँध दिया है, तंत्र मंत्र करवाया है?

उत्तर:
आप बड़े समझदार और व्यहवारिक इंसान है, १२ साल से बिज़नेस कर रहे है और आप जानते है की शुरुवात में आपने भी शून्य से चालू किया, आप को बिजनेस जमाने में ४ साल लगे, और ८ साल प्रगति का स्वाद आपने चखा है। आप बिजनेस के तीन नियम समझ ले।

(१) धंधा कभी अचानक से कम या बंद नहीं होता। इसका ट्रेंड आप को पहले से ही दिखाई देता है।
(२) धंधा कभी हर समय एक जैसा रहता नहीं उतार चढ़ाव हमेशा दिखता है। प्रोडक्ट,सेवा ,सुविधाएं और मार्केटिंग इस पर असर करते है।
(३) कोई भी धंधा बाह्य परिस्थितियों से अप्रभावित नहीं रहता, जैसे सरकार के निर्णय,वैश्विक राजनीति, स्पर्धा का वातावरण, अर्थव्यवस्था और ग्राहक एवं बाजार का रुझान इस पर असर करता है।

इन तीन नियमों को ध्यान में रखकर ही धंधा चलता है। इन तीनों कारणों पर चिंतन करना और समय समय पर अपने निर्णयों को बदलते रहना ही एक बिजनेसमैन का कार्य है। क्योंकि इन तीनों नियम अगर कह रहे है कि धंधा बंद करना चाहिए या उसमें परिवर्तन चाहिए तो ही कठिन निर्णय लेना होगा। अगर व्यापारी इन सभी प्रश्नों के व्यहवारिक उत्तर ढूंढने की बजाए तंत्र ,मंत्र या धंधे का बंधन जैसी मान्यताओं में उलझ गया तो फिर उसकी ऊर्जा भी कम होती चली जाएगी।

आपने जब काम शुरू किया था, तो आप अद्भुत ऊर्जा,उत्साह और सकारात्मकता से भरे हुए थे। फिर अपने जब प्रगति का स्वाद चखा तो भी आप की मनोदशा उन्नति के शिखर पर थी। परन्तु अब जब समय ने करवट बदली तो आप चिंतित होते है, मनोदशा की यही गिरावट आप को अंदर से विचलित करती है।
Unity - एकता , Peace - शांति Spontaneity- सहजता / स्वाभाविकता. Focus- एकाग्रता / ध्यान Creativity - रचनात्मकता / सृजनशीलता Clarity - स्पष्टता Passion - जुनून / उत्साह Enthusiasm - उत्साह / जोश Curiosity - जिज्ञासा / उत्सुकता
यह ९ प्रकार की मनोदशा में अधिकतर समय रहने वाला व्यक्ति कभी अंतर से दुखी नहीं होता, परन्तु यदि परिस्थितियां आपको इन नव मनोदशा में से गिराती है तभी आप को भय,पीड़ा,चिंता,द्वंद,संशय पकड़ते है।
इन तीन नियमों और नव मनोदशाओं पर ध्यान दे तो आपको निर्णय लेने में आसानी रहेगी।

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कर्म का फल क्या है?
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(१) कर्म के दो ही फल है, (१) कष्ट (२) मज़ा
और इन दो फल के अलग अलग नाम है , कष्ट को हम संघर्ष ,लोभ,लालच,दुख,पीड़ा,भरम कह सकते।
मज़ा को हम आनंद,शांति,संतोष सुकून कह सकते।
अब यह कर्म के फल और समय की गति का सीधा गणित है कि अगर आप को कर्म करते वक्त मज़ा आ रहा है, तो आप के समय की गति तीव्र होगी। अगर कष्ट हो रहा है तो समय आप का धीमा हो जाएगा।
समय की गति यानी घड़ी की गति नहीं, परन्तु आप के भाव की गति।
कभी किसी काम में मजा आया, उसमें खो गए तो १ घंटा भी १ मिनिट जैसा लगता है।
समय की गति,मन के भाव और कर्म के फल का सीधा संबंध है।
अब कोई पूछता है कि मुझे गाली देने में मजा आता है, तो आप गाली दे सकते हो, बाद में गाली सुनने वाला आप के साथ झगड़ा करेगा और आपको कष्ट होगा। जैसे ही कष्ट होगा फल विपरीत हो जाएगा, इसी लिए जिस कर्म से आप को भी मजा आए और दूसरों को भी मजा आए वह कर्म सर्वश्रेष्ठ है और यदि वह अहंकार से मुक्त हो तो कुदरत की तरह सब के लिए लाभदायी है।

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पैसा और उपाय
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पैसा कम है, पैसा बढ़े ऐसा सब चाहते है।
प्रश्न है कि जीवन में मै अमीर बनूंगा?, प्रोपर्टी मिलेगी?
जवाब : ज्योतिष कभी कितना पैसा कमा पाओगे यह नहीं बताता। जैसे एक छोटे या बड़े बर्तन में कितना पानी आएगा वह पानी भर कर अंदाज लगाया जा सकता है, वैसे ही जीवन में कितना वॉल्यूम आएगा यह आप का लेवल ही बता सकता है। अब यह लेवल साइकोलॉजिकल और स्पिरिचुअल है, यह भी जान ले।
साइकोलॉजी कहती है कि कम पैसा या पैसों का अभाव देख कर यदि रोज रोज आप को दुख पकड़ता है, तो आप की दरिद्रता का कारण कम पैसा नहीं, वह दुख है जो आप को पकड़ता है। और जब जब जितनी मात्रा में वह दुख बढ़ता है उतना ही आप को दरिद्रता का अहसास ज्यादा होता है।
अब आप ज्योतिषी के पास जाते हो और पूछते हो के आप के जीवन में बड़ा पैसा कब आएगा?
वह ज्योतिषी आप को दो ही चीजें बता सकता है , या तो समय या फिर उपाय। परन्तु समय की राह देखनी पड़ती है, और उपाय भी नित्य करना पड़ता है। और ज्यादातर उपाय फेल होते है। इसका अर्थ है कि बहार के टोने टोटके यंत्र मंत्र आपके साइकोलॉजिकल दुख को कम नहीं कर पाते जो अभाव को देख कर जन्मा है।
और जब तक यह दुख कम नहीं होता, यानी कि आप जो है उसमें संतोष और शांति नहीं पाते, प्रगति का द्वार नहीं खुलता। और यह मार्ग स्पीरिटुअलिटी का मार्ग है। बाह्य परिस्थितियों से प्रभावित आप के भाव विश्व में स्थाई परिवर्तन आएगा तो ही आप की परिस्थितियों में परिवर्तन आएगा।
सेल्स मैन संतोष नायर बताते है कि जब तक मैं पूरे दिन में किसी १ क्लाइंट को अपना प्रोडक्ट नहीं बेच देता, मै अपने घर नहीं जाता था।
इसका अर्थ उनके भाव विश्व में परिवर्तन को प्राप्त करने की जड़ता थी। जिसने उनको आज बहुत बड़ा बिजनेस कोच बना दिया।

आप की बाह्य परिस्थितियों का साइकोलॉजिकल वातावरण बदलना ही सच्चा उपाय है।

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કુદરત અને સેક્સ એડ્યુકેશન... આ એક અદ્ભુત વિષય છે... કુદરત તરફ થી દેહ પ્રાપ્ત થાય છે.. અને દેહ નો સ્વભાવિક ધર્મ છે વિકસિત થવું... આ વિકાસ માટે કુદરતે કોઈ પણ જીવ માં મૂળભૂત વૃતિઓ આપી છે.. (૧) નિદ્રા (૨) ભૂખ તરસ (૩) સક્રિયતા અને સુરક્ષા (૪) ભય - પીડા (૫) સેક્સ...

આ ૫ કુદરતી વૃત્તિઓ થી જ કોઈ પણ જીવ નો વિકાસ અને પોષણ સંભવ છે. નિદ્રા, ભોજન ,પાણી, સક્રિય શરીર, સુરક્ષિત વાતાવરણ ,ભય અને પીડા અંગે સભાનતા અને રક્ષા રોજે રોજ ના જીવન માં ખૂબ આવશ્યક છે... અને એટલી જ આવશ્યક છે સેક્સ ની લાગણી...

સેક્સની વૃત્તિઓ પ્રેમ, સુખની લાગણીઓ અને મનુષ્ય માં રહેલી રચનાત્મક સર્જન ક્ષમતાઓ સાથે જોડાયેલ છે.

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समय का गणित
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आज का समय प्रश्न का ,और जिज्ञासा का समय है। बुद्धिमान लोग समय के हिसाब से निर्णय लेते है और समय का गणित निर्णय लेने की क्षमता का गणित है। वह व्यक्ति जो निष्कर्ष पर पहुंचे वहीं निर्णय ले सकता है।
आज के हमारे विचार,भाव और चिंतन प्रश्न रहित है। जहां प्रश्न नहीं होगा, वहां निर्णय नहीं होगा, और जहाँ निर्णय नहीं होगा वहां प्रगति कहा से होगी?
इसे दूसरे दृष्टि से देखे...
एक विद्यार्थी को लगता है कि वह पढ़ाई में और खेलकूद में दूसरों से कमजोर है। वह इस चीज को सोचता रहता है और उसके दिमाग की बनाई हुई परिस्थितियों में फंस जाता है। इसे हम नकारात्मकता का "लूप" कहेंगे। अब इस लूप से निकलने का सबसे आसान तरीका प्रश्न है। सिर्फ "?" लगाना है , में पढ़ाई में और खेलकूद में कमजोर क्यों हूँ? और उस विद्यार्थी का चिंतन सक्रिय हो जाएगा और फिर प्रश्न के ऊपर प्रश्न करना है , क्या इसे बेहतर बनाने का कोई रास्ता है? किसी भी समस्या या उलझन से त्वरित निकलने का मार्ग प्रश्न है।
अष्टावक्र गीता, भगवद गीता और उपनिषदों की शुरुआत से ले कर विज्ञान की उपलब्धियों का चिंतन भी प्रश्न से ही निकला है।
ज्योतिष के दृष्टिकोण से प्रश्न कुंडली और टैरो जैसी विद्याओं का आविष्कार भी प्रश्न के कारण ही हुआ।
जिसके सारे प्रश्न समाप्त हो गए वह या तो ज्ञानी हो गया, या तो मूढ़। आप के पास कुछ ऐसे प्रश्न हो जो आप के चिंतन को सक्रिय करे, आप को उत्साह से भर दे, उसका उत्तर मिलने पर आप को स्पष्टता और प्रसन्नता हो तो वह प्रश्न ही उपलब्धि और प्रगति का द्वार है। हर एक समस्या को प्रश्न की तरह देखे और उसका उत्तर खोजे।
आप देखेंगे कि इस खेल में आपका अंतर विकसित होगा।

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प्रश्न : क्या जन्म की तारीख में अच्छे अंक आने से संघर्ष से मुक्ति मिलती है?
उत्तर : अंकशास्त्र के अंक विभिन्न ग्रहों से जुड़े हुए है ,और ग्रह जीवन के विभिन्न आयामों से जुड़े है। जो भी लोग जीवन को समझते है वह जानते है कि जो वस्तु या व्यक्ति जीवन में आते है वह अच्छे और बुरे दोनों अनुभव देते है , यानी कि ग्रह के जो भी कारकत्व है वह बुरे और अच्छे दोनों परिणाम देते है। जब माता और पिता अजन्मे बच्चे के लिए सर्वश्रेष्ठ जन्म तारीख चुनना चाहते है तो उसके पीछे यह माता पिता की भावना और इच्छा होती है कि जो संघर्ष और कठिनाइयाँ उन्होंने बर्दास्त की है,वह संघर्ष उन बच्चों को न भोगना पड़े। कभी कभी यह भी हो सकता है कि बच्चों को मिला हुआ आराम ही उनके लिए संघर्ष हो जाए। बच्चा जिस भी तारीख को पैदा हुआ है, उसको, परिवार,शिक्षा,धर्म,समाज,सरकार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति , अर्थव्यवस्था सब कुछ प्रभावित करता है, जिस भी वातावरण में वह पलता है, उसके अनुभव उसके प्रारब्ध का निर्माण करते है। यह बात न भूले। हा जन्म तारीख में अच्छे योग बनने से उसके गुणों के बारे में जान कर उसको उचित मार्ग पर लाया जा सकता है। और यह भी संभव है कि बुरे अंक भी सावधानी के लिए तैयार कर सकते है तो फिर चिंता क्यों?
अंकशास्त्री आपको बच्चे की जन्म तारीख देते हुए , अंक ४, अंक ८ ,अंक २ के पुनरावर्तन, अंक १,८ के योग , अंक २,८,६ के योग से बचने को कहेंगे। अब सर्जरी से जो बच्चे पैदा होंगे वह इस संभावनाओं से बचे रह सकते है।

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