संसार से कभी कोई अपेक्षा न करो यह तुम्हारी अपेक्षा भला कब पूरी कर सका है, आज कर भी देगा तो कल को किसका मुँह देखोगे, सूरज को देखो नित अपनी रौशनी से सम्पूर्ण धरा को प्रकाशित करता है पर बदले में तुमसे कुछ भी नहीं चाहता, होना है तो दाता हो जाओ याचक तो यहां बहुतेरे फिरते हैं...