गम...
गम यार है सभी का
अंबर हो या जमीं का
गम के बिना होता भी क्या,
मोल किसी खुशी का
दिलवालो के बस्ती में रहता है ख़ुशीसे
नाता है पुराना इसका प्यार के दिलोंसे
कभी इस दिल मे
कभी उस दिल मे
यही काम उसीका
गम यार है सभी का
अंबर हो या जमीं का
कभी खुशी से पहले कभी खुशी के बाद
मेहमानों सा आए जाए दिन हो चाहे रात
जब चाहे आए
जब चाहे जाए
इसपे ना जोर किसीका
गम यार है सभी का
अंबर हो या जमीं का
प्यार बहोत करता है सच्चे इंसानोसे
पर थोड़ा डरता है झुठे बईमानों से
वफ़ा है प्यारा
बेवफा है गवारा
यही पैगाम उसीका
गम यार है सभी का
अंबर हो या जमीं का
गम के बिना होता भी क्या,
मोल किसी खुशी का
Sagar...✍️
Fallow me...💝