बर्फ की मोटाई
बरसा की गहराई,
ठंड की ठिठुरन
धूप की गरमायी को
थोड़ा प्यार से तो देखो।
पत्तों के नीचे बैठे पक्षी,
छाया में आया राहगीर,
उड़ते पक्षियों की बारात
नदी का अजस्र बहाव
मछलियों के हाव-भाव
समुद्र की भाप
करुणा के सागर को,
थोड़ा प्यार से तो देखो।
* महेश रौतेला