चेहरा ये ...
चेहरा ये मन का है आइना
झरोखा है ये दिल का
चेहरे पर पड़ी ये झुर्रियाँ
निशानी है आड़े तिरछे समय की
आंखों देखी झलकियों की
चेहरे पर ये मायूसी की रेखाएँ
हैं टूटी हुई उम्मीदों की डोर के
लटके हुए छोर ज्यों कई
चहरे पर ये गीलापन
है भावों की बरखा का
ज्यों झरना नयनों से
चेहरे पर छाई ये खामोशी
ज्यों किसी अंधड़ के बाद
वीराना कोई आशियाना
चेहरे पर ये तनी भृकुटी
तनी चढ़ी प्रत्यंचा धनुष की
ज्यों भेदने को कोई लक्ष्य अजेय
चेहरे पर ये मुस्कुराहट
मुश्किलों में
है मोहर आशा की
चेहरे पर ये चमकती आंखें
ज्यों टिमटिमाते से दो दीये
भरे सारी जग-ज्योत मन के लिए
चेहरा ये मन का है आइना
झरोखा है ये दिल का
:- भुवन पांडे
#चेहरा