मे और मेरे अह्सास
कहने से बात ग़र दिल हल्का हो सकता l
पीने से जाम ग़र दिल हल्का हो सकता ll
ना कोई घुट घुट के जीता l
ना कोई खून के अश्क पिता l
रोने से आज ग़र दिल हल्का हो सकता ll
ना कोई दिल वीरा होता l
ना कोई चमन उजड़ता l
सहने से दर्द ग़र दिल हल्का हो सकता ll
दर्शिता