सुदंर गजल ..
काफिया .आ ।
रदीफ .तो होता ।
प्यार में एहसास कराया तो होता ।
इस दिल को अपना बनाया तो होता ।।
चाहत का फूल खिलाया तो होता ।
दिल को मुरजाने से बचाया तो होता ।।
अंखियों से कभी एक नजर देखा तो होता ।
कभी अपनी आँखों में बसाया तो होता ।।
कभी अपने हसीन दीदार कराया तो होता ।
अपना सुदंर आईना दिखाया तो होता ।।
सुदंर प्यार का नजारा दिखाया तो होता ।
प्यासी आँखो से प्रेम छलकाया तो होता ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,अमदाबाद ,गुजरात ।