आज मैं पिछली दिवाली की बात करता हूं। दिवाली के वेकेशन में गांव गये थे। दिवाली के दिन रात को करीब १० बजे जब पटाखे का कार्यक्रम समाप्त हुआ तो हम दोस्तो ने मिलकर सोचा कि क्यो ना हम रात को ही आंगन में रंगोली कर दे, ताकि नये साल के दिन हमारा समय बच जाए। लेकिन मुझे रंगोली का काम आता नहीं है तो मैं सोचने लगा की मैं क्या करूं? तब मैंने देखा कि आंगन में कुछ कचरा पड़ा है। मेने एक झाडु उठाया और सफाई करने लग गया।शायद गांधीजीने भी एसे अकेले ही पहला कदम उठाया होगा। मुझे कचरा जमा करता देख मेरा पड़ोसवाला दोस्त भी मेरे साथ लग गया। देखते ही देखते हम पांच छह दोस्त इकठ्ठा हो गये, और पुरे मुहल्ले की सफाई कर दी। और बाद में सबने मिलकर रंगोली का काम खत्म करके एक दुसरे को दिवाली की शुभकामनाएं दे के सोने चले गए, सुबह नये साल की शुभकामनाएं देने।