सुदंर रचना ..
विषय .सावन ..
निगाहें मिला कर ,निगाहों से पूछों ।
प्रेम की परिभाषा ,क्या होती हैं ।।
दिल को लगा कर ,दिल से पूछों ।
स्नेह की परिभाषा ,क्या होती हैं ।।
दुःख देकर व्याकुल ,दिल से पूछों ।
बिछोह की तड़पन ,क्या होती हैं ।।
महल में रह कर ,महल वालों से पूछों ।
गरीबों की छांव ,क्या होती हैं ।।
अपनों से बिछड़ कर ,अपनों से पूछों ।
तड़पन बिछड़ने की ,क्या होती हैं ।।
हवाओं से लुटते ,पेड़ों से पूछो ।
पतझर की चूभन ,क्या होती हैं ।।
सावन के अंधे की ,आँखों से पूछों ।
हरियाली की ,सुदंरता कैसी होती हैं ।।
बृजमोहन रणा ,कश्यप ,धंबोला ,हाल .अमदाबाद ,गुजरात ।