उसने कभी नहीं पूछा तुम कैसे हो?
ठीक हो भी या नहीं?
ना कभी फिर लौट आने की झूठी तसल्ली दी ना कभी मुझे जाने से रोका गया।
ऐसे हाल में भी मुझे तुम्हारे चेहरे की खुशी की फिक्र है, फिक्र है कि तुम किसी गलत हाथों में न पड़ जाओ।
फिक्र है कि कोई तुम्हे ख्वाब दिखा के बीच रास्ते छोड़ न दे।
फिक्र है कि मेरे जैसा हाल तुम्हारा ना हो।
फिक्र है कि तुम मेरे जैसे कभी किसी को ऐसे खत ना लिखो।