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जलते दिए 💖 अंधियारे की छाती चीर, वो जलता है एक अधीर। छोटा सा है उसका तन, पर पर्वत सा उसका मन। आँधी आए या तूफ़ान, झुकने को ना तैयार। तेल ख़त्म हो जाए भले ही, लड़ता रहता है हर बार। सीख यही वो दे जाता है, स्वयं जलकर जग महकाता है। हार न मानो तुम जीवन में, दीप वही जो राह दिखाता है। - Ritu Kumari
मन में एहसास क्यों है? भीतर एक अनकहा सा शोर है, ख्यालों की बहती एक महीन डोर है। सीने में धड़कती इस साँस के साथ, न जाने कैसा यह अनसुलझा अहसास है? कभी आँखों में अकारण उमड़ती नमी है, सब कुछ होकर भी जाने किसकी कमी है। हज़ारों की भीड़ में जो तन्हा कर दे, बताओ यह कौन सा गहरा अहसास है? क्या यह बीते हुए कल की कोई पुकार है? या आने वाले कल का अधूरा इंतज़ार है? जो बिना बोले ही बहुत कुछ कह जाता है, दबे पाँव आकर रूह में समा जाता है। कभी यादों की छाँव, कभी धूप सा जलाए, यह अहसास ही तो इंसान को इंसान बनाए। अगर न होता यह अहसास हमारे इस मन में, तो हम महज़ पत्थर हो जाते इस जीवन में। दुख में इन पलकों का चुपचाप भीग जाना, सुख की छोटी सी आहट पर मुस्कुराना, किसी और की तकलीफ देखकर दिल का पिघलना, और गिरकर फिर नई उम्मीद से सँभलना। यह सब इस बात की गवाही देता है, कि दिल के कोने में कोई अहसास रहता है। यह अहसास ही हमें अपनों से जोड़ता है, सहानुभूति की डोर से दिलों को बाँधता है। ज़िंदगी की इस बेरंग और भागदौड़ भरी राहों में, यही तो चुपके से मीठे रंग घोलता है। ना होता यह तो कोई किसी के लिए न रोता, ना प्यार की भाषा होती, ना कोई सपना होता। कभी यह मीठी सी टीस बनकर सताता है, तो कभी अंधेरों में उम्मीद का दिया जलाता है। यह भावना ही तो रूह का सच्चा संगीत है, जो हर दिल में बसता एक अनकहा गीत है। जब रिश्तों की डोर कभी ढीली पड़ने लगती है, यह अहसास ही तो चुपके से उसे थाम लेता है। गैरों के दर्द में जो बहता है आँसू बनकर, इंसानियत का वही तो असली पैगाम देता है। ना हो अगर अहसास तो यह दुनिया सूनी हो जाए, हर मुस्कान झूठी और हर आँख कोरी हो जाए। यह वो अदृश्य धागा है जो जग को जोड़े है, हर टूटते हुए दिल को फिर से मोड़े है। कभी राहों में बिखरी खामोशी को पढ़ लेता है, कभी बिन कहे ही दूसरों का हाल समझ लेता है। यही तो सिखाता है हमें निस्वार्थ प्रेम करना, बिना किसी शर्त के दूसरों के लिए जीना। जब रातों को नींद आँखों से रूठ जाती है, और खयालों की एक नई दुनिया सज जाती है, तब यही अहसास बनकर हमसफ़र साथ चलता है, अंधेरे कमरों में भी एक चिराग सा जलता है। यह न हो तो शब्दों का कोई मोल न रहे, फिर काव्यों में मिठास और गीतों में बोल न रहे। चित्रकार की तुलिका का रंग फीका पड़ जाए, और कवि की कल्पना का अंत हो जाए। इसलिए बहने दो इस अहसास की पावन धारा को, महसूस करने दो मन के हर छोटे-बड़े इशारे को। इसे रोको मत, यह कोई बोझ या दर्द नहीं, यह तो हमारी ज़िंदादिली का सबसे बड़ा सबूत है। कि हमारा दिल आज भी धड़कता है, हर सुख-दुख को गहराई से महसूस करता है, और इस पूरी दुनिया को अपनी आगोश में, सच्ची संवेदनाओं के साथ समेटने की ताक़त रखता है
ये पल यूँ ही गुजर जाएगा उदासियों के काले बादल, छाए हैं जो आज गगन पर, छँट जाएँगे धीमे-धीमे, सूरज फिर मुस्काएगा। धीरज धर ओ राही मन तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। जिस धूप से जलती है काया, वही तो फल को पकाती है, जिस राह में बिखरे हैं काँटे, वही तो मंज़िल तक जाती है। अँधेरी रात का अंतिम पहर ही, नया सवेरा लाएगा, तू हार मत मान ऐ परिंदे, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। सुख की सरगम, दुख की रोदन, जीवन के दो रूप यही हैं, छाँव कभी तो कभी है धूप, जग के शाश्वत रीत यही हैं। चक्र समय का घूम रहा है, जो आया है वो जाएगा, ना ठहर सका है काल कभी, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। तू क्यों चिंता के सागर में, व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा? बीत गए जो दिन कल वाले, उन्हें याद कर क्यों रो रहा? आज जो तेरा अपना है, कल कोई और ले जाएगा, बहा ले हँसी की नदियाँ तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। सपनों के जो महल ढहे हैं, फिर से नई नींव धर ले, टूटे पंखों को समेट कर, अंबर की फिर उड़ान भर ले। ज़िंदगी नाम है चलने का, ठहरा पानी सड़ जाएगा, तू कदम बढ़ा आगे अपने, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। हँसकर सह ले हर बाण समय का, यह भी एक इम्तिहान ही है, जीत-हार तो एक पहेली, संघर्ष ही पहचान ही है। जब दुख के पर्वत पिघलेंगे, सुख का झरना बह जाएगा, मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। रिश्ते-नाते, मान और माया, सब माटी का एक ढेला है, आए थे हम अकेले जग में, जाना भी तो अकेला है। फिर किस बात का अभिमान करे तू, क्या साथ तेरे जाएगा? जो आज तेरा है, कल न रहेगा, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। चट्टानों को फाड़कर भी तो, नन्हे पौधे उग आते हैं, तूफानों से जो लड़ते हैं, वही तो इतिहास बनाते हैं। घबरा मत इस खामोशी से, शोक का शोर थम जाएगा, रख विश्वास तू अपने रब पर, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। हर शाम के बाद आती है सुबह, हर पतझड़ के बाद बहार, फिर महकेंगे उपवन तेरे, फिर गूँजेगी कोयल की पुकार। साँसों का यह अनमोल सफ़र, धीरे-धीरे घट जाएगा, जी ले हर लम्हा खुलकर तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। उदासियों के काले बादल, छाए हैं जो आज गगन पर, छँट जाएँगे धीमे-धीमे, सूरज फिर मुस्काएगा। धीरज धर ओ राही मन तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। जिस धूप से जलती है काया, वही तो फल को पकाती है, जिस राह में बिखरे हैं काँटे, वही तो मंज़िल तक जाती है। अँधेरी रात का अंतिम पहर ही, नया सवेरा लाएगा, तू हार मत मान ऐ परिंदे, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। सुख की सरगम, दुख का रोदन, जीवन के दो रूप यही हैं, छाँव कभी तो कभी है धूप, जग की शाश्वत रीत यही हैं। चक्र समय का घूम रहा है, जो आया है वो जाएगा, ना ठहर सका है काल कभी, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। तू क्यों चिंता के सागर में, व्यर्थ स्वयं को डुबो रहा? बीत गए जो दिन कल वाले, उन्हें याद कर क्यों रो रहा? आज जो तेरा अपना है, कल कोई और ले जाएगा, बहा ले हँसी की नदियाँ तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। सपनों के जो महल ढहे हैं, फिर से नई नींव धर ले, टूटे पंखों को समेट कर, अंबर की फिर उड़ान भर ले। ज़िंदगी नाम है चलने का, ठहरा पानी सड़ जाएगा, तू कदम बढ़ा आगे अपने, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। हँसकर सह ले हर बाण समय का, यह भी एक इम्तिहान ही है, जीत-हार तो एक पहेली, संघर्ष ही पहचान ही है। जब दुख के पर्वत पिघलेंगे, सुख का झरना बह जाएगा, मुस्कुरा कर कह दे ज़माने से, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। रिश्ते-नाते, मान और माया, सब माटी का एक ढेला है, आए थे हम अकेले जग में, जाना भी तो अकेला है। फिर किस बात का अभिमान करे तू, क्या साथ तेरे जाएगा? जो आज तेरा है, कल न रहेगा, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। चट्टानों को फाड़कर भी तो, नन्हे पौधे उग आते हैं, तूफानों से जो लड़ते हैं, वही तो इतिहास बनाते हैं। घबरा मत इस खामोशी से, शोक का शोर थम जाएगा, रख विश्वास तू अपने रब पर, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। हर शाम के बाद आती है सुबह, हर पतझड़ के बाद बहार, फिर महकेंगे उपवन तेरे, फिर गूँजेगी कोयल की पुकार। साँसों का यह अनमोल सफ़र, धीरे-धीरे घट जाएगा, जी ले हर लम्हा खुलकर तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। मायूसी के अंधेरे में भी, उम्मीद की एक शमा जला, जो रूठ गए हैं ख़्वाब तेरे, उन्हें मनाकर फिर से चला। अंगारों पर चलकर ही तो, सोना कुंदन बन पाएगा, हौसला रख तू अपने दिल में, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। वक़्त का दरिया बहता जाए, कोई इसे रोक न पाए, कितने आए, कितने गए, कोई अपना निशान न छोड़े जाए। फिर भी तू इस बहती धारा में, क्यों अपना धीरज खोता है? दुख की घड़ियाँ ढल जाएँगी, जब नया प्रभात मुस्कुराएगा। तू राह देखकर मत घबरा, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। जो खो गया वो लौटेगा नहीं, जो पाना है वो आगे है, सपनों की इस पतंग की, उम्मीद ही तो धागे हैं। जब तक साँसें चलती हैं तेरी, तब तक आस बाकी है, जीवन के इस समर में तू, खुद से कभी न हारी है। कल का सूरज फिर एक बार, नई उम्मीदें लाएगा, सबर रख ओ मन के पंछी, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। समय न रुका है किसी के लिए, न ये कभी रुक पाएगा, जो आज तुझे तड़पाता है, कल वही सुकून दे जाएगा। ज़िंदगी की इस कठिन किताब का, एक पन्ना यह भी बीत जाएगा, मुस्कुरा कर आगे बढ़ तू, ये पल यूँ ही गुजर जाएगा। सार: समय कभी एक जैसा नहीं रहता। सुख हो या दुख, सफलता हो या असफलता—संसार का सबसे बड़ा नियम यही है कि "यह समय भी बीत जाएगा।" इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य और आशा बनाए रखें
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