English Quote in Story by Raju kumar Chaudhary

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मेरी भाभी नहीं, मेरी माँ

Episode 4: एक छोटा घर और बड़ी जिम्मेदारी

रात काफी हो चुकी थी।

रामपुर गाँव की गलियाँ लगभग सुनसान थीं। दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी और आसमान में बादल छाए हुए थे।

सुमित एक हाथ में अमित की तस्वीर और दूसरे हाथ में छोटा-सा बैग लिए चल रहा था।

उसके साथ सावित्री थी।

सावित्री बार-बार पीछे मुड़कर उस घर को देख रही थी, जहाँ उसने अपने पति के साथ जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन बिताए थे।

अब वह घर पीछे छूट चुका था।

सुमित ने उसकी तरफ देखा।

“भाभी, आप परेशान मत होइए।”

सावित्री ने धीमे स्वर में कहा—

“मैं अपने लिए नहीं रो रही हूँ, सुमित।”

“तो फिर?”

“मुझे डर लग रहा है।”

“किस बात का?”

सावित्री ने अपने पेट पर हाथ रखा।

“इस बच्चे के भविष्य का।”

सुमित कुछ पल चुप रहा।

फिर उसने कहा—

“जब तक मैं हूँ, आपको और बच्चे को किसी चीज की कमी नहीं होने दूँगा।”

सावित्री ने उसकी ओर देखा।

“लेकिन तुम्हारी भी तो जिंदगी है।”

सुमित मुस्कुराया।

“मेरी जिंदगी में अब आप दोनों भी शामिल हैं।”

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छोटा-सा घर

काफी तलाश के बाद उन्हें गाँव के बाहर एक पुराना छोटा-सा मकान मिल गया।

मकान बहुत बड़ा नहीं था।

एक छोटा कमरा, एक रसोई और सामने मिट्टी का छोटा-सा आँगन।

मकान के मालिक ने कहा—

“कमरा साधारण है, लेकिन किराया कम है।”

सुमित ने पूछा—

“कितना?”

“हर महीने तीन हजार रुपये।”

सुमित ने अपनी जेब टटोली।

उसके पास कुछ ही पैसे थे।

उसने सावित्री की तरफ देखा।

सावित्री समझ गई।

“अगर मुश्किल है तो हम कोई दूसरा घर देख लेते हैं।”

सुमित ने सिर हिलाया।

“नहीं। यही ठीक है।”

उसने अपनी जेब से पैसे निकाले और मकान मालिक को अग्रिम किराया दे दिया।

मकान मालिक ने चाबी देते हुए कहा—

“कल से रह सकते हो।”

सुमित ने चाबी हाथ में ली।

उसने दरवाजा खोला।

अंदर खाली कमरा था।

न बिस्तर।

न अलमारी।

न कोई सामान।

सावित्री दरवाजे पर खड़ी होकर कमरे को देखने लगी।

फिर हल्की मुस्कान के साथ बोली—

“कम से कम हमारा अपना तो है।”

सुमित ने कहा—

“हाँ। छोटा है, लेकिन यहाँ किसी को आपको घर से निकालने का अधिकार नहीं होगा।”

सावित्री की आँखें भर आईं।

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पहली रात

उस रात दोनों ने जमीन पर चादर बिछाई।

सावित्री एक तरफ लेट गई।

सुमित दरवाजे के पास बैठा अमित की तस्वीर देख रहा था।

सावित्री ने पूछा—

“सोए नहीं?”

“नहीं।”

“क्यों?”

“सोच रहा हूँ।”

“क्या?”

“कल से काम ढूँढना है।”

सावित्री ने कहा—

“तुम्हें इतना सब करने की जरूरत नहीं है।”

सुमित ने तस्वीर की तरफ देखते हुए कहा—

“जरूरत है।”

“लेकिन तुम अकेले कितना करोगे?”

“जितना होगा, करूँगा।”

सुमित ने अमित की तस्वीर से कहा—

“भैया, आपने कहा था कि मैं अपने परिवार को संभालूँगा। अब मैं पीछे नहीं हटूँगा।”

---

नौकरी की तलाश

अगली सुबह सूरज निकलने से पहले ही सुमित उठ गया।

उसने पुराने कपड़े पहने और नौकरी की तलाश में निकल पड़ा।

पहली जगह उसने एक दुकान पर काम माँगा।

दुकानदार ने पूछा—

“क्या काम आता है?”

सुमित ने कहा—

“जो काम देंगे, सीख लूँगा।”

दुकानदार ने कहा—

“अभी जगह खाली नहीं है।”

सुमित दूसरी जगह गया।

फिर तीसरी जगह।

फिर चौथी जगह।

हर जगह उसे कोई न कोई बहाना सुनने को मिला।

दोपहर तक उसके पैर थक चुके थे।

लेकिन वह रुका नहीं।

आखिर शाम को उसे एक छोटे से गोदाम में काम मिल गया।

तनख्वाह बहुत कम थी।

लेकिन सुमित के लिए वह नौकरी बहुत बड़ी थी।

उसने मालिक से कहा—

“मैं पूरी मेहनत करूँगा।”

मालिक ने कहा—

“कल सुबह से आ जाना।”

सुमित के चेहरे पर पहली बार मुस्कान आई।

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घर में इंतजार

उधर सावित्री घर में अकेली बैठी थी।

उसने अपनी पुरानी किताबें निकालीं।

एक किताब खोली।

पहले पन्ने पर उसका नाम लिखा था।

“सावित्री — भविष्य की डॉक्टर।”

वह कुछ देर उस नाम को देखती रही।

फिर उसकी आँखों से आँसू निकल आए।

“क्या मैं सच में डॉक्टर बन पाऊँगी?”

उसी समय बाहर से सुमित की आवाज आई—

“भाभी!”

सावित्री ने किताब बंद कर दी।

“आ गए?”

सुमित अंदर आया।

उसके चेहरे पर थकान थी।

सावित्री ने पूछा—

“नौकरी मिली?”

सुमित मुस्कुराया।

“हाँ।”

“कहाँ?”

“एक गोदाम में।”

“तनख्वाह?”

सुमित ने रकम बताई।

सावित्री चुप हो गई।

उसे पता था कि इतनी कम रकम में घर चलाना आसान नहीं होगा।

सुमित ने कहा—

“चिंता मत कीजिए।”

“मैं चिंता नहीं करूँगी तो कौन करेगा?”

दोनों हल्का-सा मुस्कुरा दिए।

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पहला खाना

उस रात घर में खाने के लिए केवल थोड़े-से चावल थे।

सावित्री ने खिचड़ी बना ली।

दोनों एक ही थाली में खाने बैठे।

सुमित ने पहला निवाला उठाया और कहा—

“बहुत स्वादिष्ट है।”

सावित्री हँस पड़ी।

“झूठ बोल रहे हो।”

“सच में।”

“इसमें तो नमक भी कम है।”

सुमित ने कहा—

“तो क्या हुआ? मेहनत का स्वाद ज्यादा है।”

दोनों हँस पड़े।

कई दिनों बाद सावित्री के चेहरे पर मुस्कान आई थी।

लेकिन वह मुस्कान ज्यादा देर नहीं रही।

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अचानक दर्द

रात में सावित्री को अचानक पेट में तेज दर्द महसूस हुआ।

उसने अपना पेट पकड़ लिया।

“सुमित...”

सुमित तुरंत उठ गया।

“क्या हुआ?”

“पता नहीं... बहुत दर्द हो रहा है।”

सुमित घबरा गया।

“भाभी, अस्पताल चलते हैं।”

उसने तुरंत बाहर जाकर पड़ोसी से मदद माँगी।

एक ऑटो की व्यवस्था हुई।

सुमित सावित्री को लेकर अस्पताल की ओर दौड़ा।

उसके मन में केवल एक डर था—

“मेरे भाई की आखिरी निशानी को कुछ नहीं होना चाहिए।”

अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टर ने सावित्री को अंदर ले लिया।

सुमित बाहर खड़ा होकर लगातार प्रार्थना करने लगा।

कुछ देर बाद डॉक्टर बाहर आए।

सुमित दौड़कर उनके पास गया।

“डॉक्टर साहब, भाभी कैसी हैं?”

डॉक्टर ने कहा—

“अभी चिंता की बात नहीं है। लेकिन उन्हें आराम और नियमित जाँच की जरूरत है।”

सुमित ने राहत की साँस ली।

“मैं ध्यान रखूँगा।”

डॉक्टर ने कहा—

“उन्हें तनाव से भी बचाइए।”

सुमित ने सावित्री की ओर देखा।

उसे याद आया कि पिछले कुछ दिनों में उसने कितना कुछ सहा था।

उसने मन ही मन फैसला किया—

“अब भाभी को किसी भी हालत में अकेला महसूस नहीं होने दूँगा।”

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अगली सुबह

सुबह सुमित काम पर जाने के लिए तैयार हो रहा था।

सावित्री ने उसे रोककर कहा—

“सुमित।”

“जी?”

“मेरी पढ़ाई के बारे में मैंने सोचा है।”

सुमित मुस्कुराया।

“क्या?”

“मैं पढ़ाई फिर से शुरू करना चाहती हूँ।”

सुमित ने बिना देर किए कहा—

“तो फिर शुरू कीजिए।”

सावित्री ने कहा—

“लेकिन किताबें, फीस, अस्पताल का खर्च...”

सुमित ने उसकी बात बीच में रोक दी।

“एक-एक करके सब होगा।”

“तुम इतना भरोसा कैसे करते हो?”

सुमित ने कहा—

“क्योंकि मुझे अपने भाई पर भरोसा था। और अब मुझे आप पर भरोसा है।”

सावित्री की आँखें नम हो गईं।

उसने किताब अपने हाथ में ली।

और उसी दिन से उसकी जिंदगी का एक नया अध्याय शुरू हुआ।

लेकिन दूसरी तरफ...

सुमित जिस गोदाम में काम करने जा रहा था, वहाँ उसका सामना ऐसे व्यक्ति से होने वाला था जो आगे चलकर उसकी जिंदगी बदल देगा।

और उसी दिन उसे पता चलने वाला था कि सिर्फ नौकरी करना काफी नहीं होगा—उसे अपनी भाभी की पढ़ाई के लिए बहुत बड़ा फैसला लेना पड़ेगा।

जारी रहेगा...

अगला एपिसोड:

Episode 5 — “भाभी की किताबें और सुमित का पहला बलिदान

English Story by Raju kumar Chaudhary : 112033721
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