मौसम हैं ये बारिश का
मौसम है ये बारिश का,
जमीन पे जो बूंदे गिरा।।
बूंद बूंद मै है जो भरा,
उसी मै हमारा जीवन घिरा।।
जल ही है जीवन हमारा,
बारिश के बिना दुनिया न हमारा।।
इस सौंदर्य रूप को कौन देखे भला ,
जिनकी भावनाओं से जुड़ी हो कला।।
जिस रूप से देखो तुम प्रकृति के रूप,
उस रूप से दिखेगा तुम्हे सौंदर्य का स्वरुप।।
जो बूंदे बनकर गिरती हैं,
बरसात मै हमे मिलती है।।
उसी बूंदे हम नकारते है,
समय पर उसी बूंदे को हम ढूंढते है।
बादल गरजते हैं बारिश होती हैं ,
बाढ़ आती है तालमेल कर जाती है।।
खेत- खलियानों को डुबो ले जाती है,
साथ ही किसान की जिंदगी भी डुबो जाती है।।
पौधों को जीवन देती है,
जीवों को जीवन देती है।।
साथ ही संसार को जीवन दे जाती हैं
ऐसा है ये बारिश का मौसम ।।