दर्द से भरी ये जिन्दगानी हमारी |
खाली पन्नो से भरी एक कहानी हमारी ||
छू ले आसमानो को ये उम्र है |
पर मुस्किलो से जुझती जवानी हमारी ||
ना जाने समुद्र क्यू खफा है रहता हमसे |
जो लहरो मे डूबा दे कश्तियां हमारी ||
सब की नजर और मुक्कमल है हम |
कोई क्या जाने ये बदहाली हमारी ||
अब दिनो की परवाह छोड़ी दी है हमने |
थोड़ा जो सुकु दे बस वो राते हमारी ||
-MASHAALLHA