मेरे मन में एक सवाल उठा.........
अगर द्रौपदी को बचाने कृष्ण नहीं आते तो....
तो क्या पांचों पति अपनी गर्दन नीची करके उसका बलात्कार होने देते.
पांच पति होने के बावजूद भी माधव को बुलाना पड़े.....
तो क्या हम पुरुष के पुरुषत्व पर सवाल उठा सकते है।
मेरे मन में एक सवाल उठा..........
बचपन से लड़कियों को गुलाबी रंग और लड़कों को नीले रंग के कपड़े और खिलौने ही क्यों दिए गए..
क्यों लड़कियों को कोमल सी गुड़िया और लड़कों को सक्त बनने पर मजबूर किया गया......
अगर पुरुष कमजोर हुआ तो उसे चूड़ियां पहनने के लिए कहा गया
यदि चूड़ियां कमजोरी की निशानी है तो रण चंडी मां दुर्गा के सोलह श्रृंगार में चूड़ियों को हटा देना चाहिए।
मेरे मन में एक सवाल उठा.........
औरत मां नहीं बनने पर बांझ कहलाई .
पुरुष बाप नहीं बनने पर क्या कहलाया ?
मैं बांझ का पुल्लिंग शब्द ढूंढ रही हूँ।
मेरे मन में एक सवाल उठा.........
माना कि महिला और पुरुष की शारीरिक बनावट अलग है. ईश्वर ने महिला को प्रजनन की क्षमता दी है
लेकिन ईश्वर ने नौकरी की क्षमता पुरुष को ही क्यों दी और महिला को घर के काम करने की।
मेरे मन में एक सवाल उठा.........
लोग कहते है जोड़ियां ऊपर से बन कर आती है...
तब तो पक्का ईश्वर जातिवाद को बढ़ावा देता है समान जात में जोड़ियां बनाकर भेजता है।
( काफी दिनों से ये सवाल मेरे मन में थे जिसे मैंने आपके साथ सांझा किया है )
✍️ अंतिमा 😊