जिंदगी से हार कर,यूं रोते न बैठेंगें

है अगर हौसला तो एक राह नई बनाऐंगें।

आँखों से बहते अश्रु को ताकत हम बनाऐंगें।
मंजिल है पाना हमें, राहों मे काटें तो आऐंगें,
है अगर हौसला तो एक राह नई बनाऐंगें।

मानवता को इस जग मे पुनः वापस लाऐंगे
मानव रूप दोया उसने हम इसका कर्ज चुकाऐंगें,
है अगर हौसला तो एक राह नई बनाऐंगें।

एक धर्म है,एक जात है सबको हम बताऐंगें
है मानवता धर्म हमारा,है जात हमारी भारतीए, ये बात सबको बताऐंगें।

Hindi Shayri by Anushruti priya : 78
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