Hindi Quote in Poem by Skp divine

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कागज़ की कहानी

मैं कागज़ हूँ…
सफेद हूँ, शांत हूँ,
पर मेरी खामोशी के भीतर
हज़ारों आवाज़ें पलती हैं।

कभी मैं किसी पेड़ की शाख पर
हवा के साथ झूमता था,
सूरज की किरणों को पीता था,
बारिश की बूंदों से बातें करता था।
मेरी नसों में हरियाली थी,
मेरी साँसों में जंगल था,
मेरी छाया में कोई थका मुसाफिर
कुछ पल चैन से बैठता था।

फिर एक दिन
समय ने मेरी कहानी मोड़ दी।
मैं पेड़ से अलग हुआ,
टुकड़ों में बिखरा,
पानी में घुला,
मशीनों से गुज़रा,
और एक दिन
मैं कागज़ बनकर जन्मा।

मेरा रंग सफेद था,
लेकिन मेरा जीवन
रंगों से भी ज्यादा गहरा था।

किसी ने मुझ पर
पहली बार अपना नाम लिखा,
किसी ने प्रेम का पहला शब्द।
किसी बच्चे ने
अक्षर लिखना सीखा,
तो किसी माँ ने
अपने बेटे के लिए
आशीर्वाद लिख भेजा।

किसी प्रेमी ने लिखा—
“मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा।”

किसी सैनिक के पत्र में
घर की मिट्टी की खुशबू थी।

किसी बूढ़े पिता ने
काँपते हाथों से
अपनी बेटी को लिखा,
“खुश रहना…”

और मैं चुपचाप
हर भावना को अपने भीतर
सहेजता रहा।

कभी मैं किताब बना,
कभी कविता,
कभी कहानी,
कभी किसी का सपना।

कभी मेरे ऊपर
किसी ने अपना भविष्य लिखा,
तो कभी किसी ने
अपने अतीत के आँसू गिराए।

मैंने अदालतों के फैसले देखे,
स्कूलों की कॉपियाँ देखीं,
कवियों के अधूरे शब्द देखे,
लेखकों की रातें देखीं।

मैंने वह भी देखा
जो इंसान दुनिया से छिपाता है।

कितनी अजीब बात है—
लोग मुझे निर्जीव कहते हैं,
लेकिन मैं तो
हर लिखे हुए शब्द की धड़कन सुनता हूँ।

मेरे ऊपर लिखी
एक छोटी-सी पंक्ति
किसी का जीवन बदल देती है।

एक हस्ताक्षर
किसी का भविष्य तय कर देता है।

एक पत्र
दो दूर बैठे दिलों को
फिर पास ला देता है।

एक कविता
किसी टूटे हुए मन में
फिर से सुबह जगा देती है।

लेकिन मेरी कहानी
हमेशा सुंदर नहीं रही।

कभी मुझे फाड़ दिया गया,
कभी जला दिया गया,
कभी कूड़ेदान में फेंक दिया गया।

जिस पर कभी
किसी की सबसे कीमती बात लिखी थी,
वही मैं
एक दिन बेकार कहलाया।

तब मैंने जाना—
इंसान अक्सर चीज़ों की कीमत
उनके रहते नहीं समझता।

फिर भी मैं नाराज़ नहीं हूँ।

क्योंकि मेरी नियति
सिर्फ़ बचकर रहना नहीं,
किसी के जीवन में
कुछ छोड़ जाना है।

मैं मिट जाऊँ,
मेरे अक्षर मिट जाएँ,
मेरी सतह पीली पड़ जाए—
फिर भी यदि
मेरे ऊपर लिखा कोई शब्द
किसी के दिल में जीवित है,
तो मैं अभी भी जीवित हूँ।

मैं कागज़ हूँ।

मेरी शुरुआत
एक पेड़ से हुई थी,
लेकिन मेरी मंज़िल
इंसान के हृदय में है।

मुझे मोड़ सकते हो,
फाड़ सकते हो,
जला सकते हो—

पर यदि मैंने
किसी के मन की सच्चाई
एक बार अपने भीतर रख ली,

तो वह कहानी
मेरे जाने के बाद भी
कहीं न कहीं
साँस लेती रहेगी।

क्योंकि कागज़ केवल कागज़ नहीं होता—

कभी वह
किसी की याद होता है,

कभी किसी का प्रेम,

कभी किसी की पुकार,

कभी किसी की आखिरी चिट्ठी,

और कभी…

किसी अनजान इंसान के हाथ में
जन्म लेती हुई
एक नई दुनिया

Hindi Poem by Skp divine : 112035780
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