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Skp divine

Skp divine

@skptech
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কাগজের গল্প

আমি কাগজ...

সাদা আমি, নীরব আমি,
তবুও আমার এই নীরবতার মাঝে
লুকিয়ে আছে হাজার হাজার কণ্ঠস্বর,
হাজার মানুষের মনের কথা।

একদিন আমি ছিলাম
একটি সবুজ গাছের ডালে।
হাওয়া এলে
ডালের সঙ্গে দুলতাম,
বৃষ্টির ফোঁটার সঙ্গে
নীরবে কথা বলতাম,
সূর্যের আলোয়
সবুজ পাতার ফাঁকে
সোনার মতো ঝলমল করতাম।

আমার শিরায় ছিল সবুজের প্রাণ,
আমার নিঃশ্বাসে ছিল
জঙ্গলের মাটির গন্ধ,
আমার ছায়ায় বসে
ক্লান্ত পথিক
কিছুটা শান্তি পেত।

কিন্তু একদিন
আমার জীবনের গল্প বদলে গেল।

আমি গাছ থেকে আলাদা হলাম,
টুকরো টুকরো হয়ে গেলাম,
জলের সঙ্গে মিশলাম,
যন্ত্রের ভেতর দিয়ে গেলাম,
আর একদিন
নতুন রূপে জন্ম নিলাম...

আমি হয়ে গেলাম কাগজ।

আমার শরীর ছিল সাদা,
কিন্তু আমার জীবনের পাতায়
লুকিয়ে ছিল অসংখ্য রং।

কেউ আমার ওপর
প্রথমবার নিজের নাম লিখল।

কেউ লিখল
ভালোবাসার প্রথম শব্দ।

একটি ছোট্ট শিশু
আমার ওপর অক্ষর লিখতে লিখতে
তার ভবিষ্যতের
প্রথম দরজা খুলল।

একজন মা
তার সন্তানের জন্য
আমার ওপর আশীর্বাদ লিখলেন।

একজন বাবা
দূরে থাকা মেয়েকে লিখলেন—

“সবসময় ভালো থেকো।”

কোনো এক প্রেমিক
কাঁপা হাতে লিখল—

“আমি তোমাকে কোনোদিন ভুলব না।”

আমি কিছু বলিনি,
শুধু প্রতিটি শব্দকে
আমার বুকের মধ্যে
যত্ন করে রেখে দিয়েছি।

কখনো আমি বই হয়েছি,
কখনো কবিতা,
কখনো গল্প,
কখনো কারও স্বপ্ন।

কেউ আমার ওপর
তার ভবিষ্যৎ লিখেছে,
আবার কেউ
তার অতীতের চোখের জল
আমার ওপর ঝরিয়েছে।

আমি দেখেছি
ছাত্রছাত্রীদের পরীক্ষার খাতা,
লেখকদের নির্ঘুম রাত,
কবিদের অসম্পূর্ণ পঙ্‌ক্তি,
আর সৈনিকদের লেখা চিঠি।

সেই চিঠির পাতায়
আমি অনুভব করেছি
বাড়ির মাটির গন্ধ,
মায়ের ভালোবাসা,
প্রিয়জনের অপেক্ষা।

আমি দেখেছি
সেইসব কথাও
যা মানুষ পৃথিবীর কাছ থেকে
লুকিয়ে রাখে।

মানুষ বলে
আমি জড়।

কিন্তু আমি জানি—
প্রতিটি লেখা শব্দের
একটি হৃদয় আছে।

আমার ওপর লেখা
একটি ছোট্ট বাক্যও
কারও পুরো জীবন
বদলে দিতে পারে।

একটি স্বাক্ষর
কারও ভবিষ্যৎ নির্ধারণ করতে পারে।

একটি চিঠি
দূরে থাকা দুটি হৃদয়কে
আবার কাছে এনে দিতে পারে।

আর একটি কবিতা
ভেঙে যাওয়া মনে
আবার আশার সকাল
জাগিয়ে তুলতে পারে।

তবুও আমার গল্প
সবসময় সুন্দর ছিল না।

কখনো আমাকে ছিঁড়ে ফেলা হয়েছে,
কখনো পুড়িয়ে দেওয়া হয়েছে,
কখনো আবর্জনার স্তূপে
ফেলে দেওয়া হয়েছে।

যার ওপর একদিন
কারও সবচেয়ে মূল্যবান অনুভূতি
লেখা হয়েছিল,

সেই আমিই
একদিন হয়ে গেলাম
“অপ্রয়োজনীয়”।

তখন বুঝলাম—

মানুষ প্রায়ই
কোনো কিছুর মূল্য
সেটি কাছে থাকতেই
বুঝতে পারে না।

তবুও
আমার কোনো অভিযোগ নেই।

কারণ আমার জীবনের উদ্দেশ্য
শুধু বেঁচে থাকা নয়।

আমার উদ্দেশ্য—
কারও হৃদয়ের মধ্যে
একটি সত্য রেখে যাওয়া।

আমি নষ্ট হয়ে যাই,
আমার অক্ষর মুছে যায়,
আমার সাদা রং হলুদ হয়ে যায়,

তবুও যদি
আমার ওপর লেখা
একটি শব্দও
কারও হৃদয়ে জীবন্ত থাকে,

তাহলে...

আমি এখনও বেঁচে আছি।

আমি কাগজ।

আমার শুরু হয়েছিল
একটি গাছ থেকে,
কিন্তু আমার সত্যিকারের ঠিকানা
মানুষের হৃদয়ে।

আমাকে ভাঁজ করতে পারো,
আমাকে ছিঁড়ে ফেলতে পারো,
আমাকে পুড়িয়ে দিতে পারো—

কিন্তু যদি আমি
কারও মনের সত্যকে
একবার আমার মধ্যে
সযত্নে রেখে দিই,

তাহলে আমার গল্প
আমার অস্তিত্বের পরেও
কোথাও না কোথাও
শ্বাস নিতে থাকবে।

কারণ...

কাগজ শুধু কাগজ নয়।

কখনো সে
কারও স্মৃতি,

কখনো কারও ভালোবাসা,

কখনো কারও প্রার্থনা,

কখনো কারও শেষ চিঠি,

আর কখনো...

কোনো অচেনা মানুষের হাতে
জন্ম নেওয়া
একটি নতুন পৃথিবী।

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कागदाची कहाणी

मी कागद आहे...

पांढरा आहे, शांत आहे,
पण माझ्या या शांततेच्या आत
हजारो आवाज दडलेले आहेत,
हजारो मनांच्या कथा
माझ्या अंगावर उमटलेल्या आहेत.

एकेकाळी मी होतो
एका हिरव्यागार झाडाच्या फांदीवर.
वारा आला की
फांदीसोबत डोलायचो,
पावसाच्या थेंबांशी
मनमोकळ्या गप्पा मारायचो,
आणि सूर्याची किरणे पडली की
हिरव्या पानांतून
सोन्यासारखा चमकायचो.

माझ्या शिरांमध्ये हिरवळ होती,
माझ्या श्वासात जंगलाचा सुगंध होता,
माझ्या सावलीत
थकलेला प्रवासी
दोन क्षण विसावा घ्यायचा.

पण एक दिवस
माझ्या आयुष्याची दिशा बदलली.

मी झाडापासून वेगळा झालो,
तुकडे तुकडे झालो,
पाण्यात मिसळलो,
यंत्रांमधून प्रवास केला,
आणि एका दिवशी
माझा नव्याने जन्म झाला...

मी कागद झालो.

माझा रंग पांढरा होता,
पण माझ्या आयुष्यात
असंख्य रंग दडलेले होते.

कुणीतरी माझ्यावर
पहिल्यांदा आपले नाव लिहिले.

कुणीतरी
प्रेमाचा पहिला शब्द लिहिला.

एका छोट्या मुलाने
माझ्यावर अक्षरे गिरवत गिरवत
आपल्या भविष्याची
पहिली पायरी चढली.

एका आईने
आपल्या मुलासाठी
माझ्यावर आशीर्वाद लिहिला.

एका वडिलांनी
दूर असलेल्या मुलीला लिहिले—

“नेहमी आनंदी राहा.”

एका प्रियकराने
थरथरत्या हातांनी लिहिले—

“मी तुला कधीच विसरणार नाही.”

मी काहीच बोललो नाही,
फक्त त्या प्रत्येक शब्दाला
माझ्या हृदयात जपून ठेवले.

कधी मी पुस्तक झालो,
कधी कविता,
कधी कथा,
कधी एखाद्याचे स्वप्न.

कुणीतरी माझ्यावर
आपले भविष्य लिहिले,
तर कुणीतरी
आपल्या भूतकाळाचे अश्रू
माझ्यावर सांडले.

मी विद्यार्थ्यांच्या
परीक्षेच्या वह्या पाहिल्या,
लेखकांच्या जागून काढलेल्या रात्री पाहिल्या,
कवींच्या अपूर्ण ओळी पाहिल्या,
आणि सैनिकांच्या पत्रांमध्ये
घरच्या मातीचा सुगंध अनुभवला.

मी तेही पाहिले
जे माणूस जगापासून लपवतो.

लोक म्हणतात
मी निर्जीव आहे.

पण मला माहीत आहे—
प्रत्येक लिहिलेल्या शब्दाला
एक हृदय असते.

माझ्यावर लिहिलेली
एक छोटीशी ओळसुद्धा
कुणाचे संपूर्ण आयुष्य
बदलू शकते.

एक छोटीशी सही
कुणाचे भविष्य ठरवू शकते.

एक पत्र
दूर गेलेल्या दोन हृदयांना
पुन्हा जवळ आणू शकते.

आणि एक कविता
तुटलेल्या मनात
पुन्हा आशेची पहाट
उगवू शकते.

पण माझी कहाणी
नेहमीच सुंदर नव्हती.

कधी मला फाडून टाकले गेले,
कधी जाळून टाकले गेले,
कधी कचऱ्याच्या ढिगात
फेकून दिले गेले.

ज्यावर कधीकाळी
कुणाची सर्वात मौल्यवान भावना
लिहिली गेली होती,

तोच मी
एका दिवसात
“निरुपयोगी” ठरलो.

तेव्हा मला जाणवले—

माणूस अनेकदा
एखाद्या गोष्टीची किंमत
ती जवळ असताना
समजून घेत नाही.

तरीही
माझी कोणतीही तक्रार नाही.

कारण माझ्या आयुष्याचे ध्येय
फक्त जिवंत राहणे नाही.

माझे ध्येय आहे—
कुणाच्या तरी हृदयात
एक सत्य सोडून जाणे.

मी नष्ट झालो,
माझे अक्षर पुसले गेले,
माझा रंग पिवळा पडला,

तरीही जर
माझ्यावर लिहिलेला
एकही शब्द
कुणाच्या हृदयात जिवंत राहिला,

तर...

मी अजूनही जिवंत आहे.

मी कागद आहे.

माझी सुरुवात
एका झाडापासून झाली,
पण माझे खरे गंतव्य
माणसाचे हृदय आहे.

मला वाकवू शकता,
मला फाडू शकता,
मला जाळू शकता—

पण जर मी
कुणाच्या मनातील सत्य
एकदा माझ्या अंगावर
जपून ठेवले असेल,

तर माझी कहाणी
माझ्या अस्तित्वानंतरही
कुठेतरी
श्वास घेत राहील.

कारण...

कागद म्हणजे
फक्त कागद नसतो.

कधी तो
कुणाची आठवण असतो,

कधी कुणाचे प्रेम,

कधी कुणाची प्रार्थना,

कधी कुणाचे शेवटचे पत्र,

आणि कधी...

एखाद्या अनोळखी माणसाच्या हातात
जन्म घेणारे
एक नवे जग असते.

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କାଗଜର କାହାଣୀ

ମୁଁ କାଗଜ...

ଧଳା ମୁଁ, ନିରବ ମୁଁ,
ତଥାପି ମୋ ନିରବତା ଭିତରେ
ଲୁଚି ରହିଛି
ହଜାର ହଜାର କାହାଣୀ,
ହଜାର ହୃଦୟର କଥା।

ଦିନେ ମୁଁ ଥିଲି
ଗୋଟିଏ ସବୁଜ ଗଛର ଡାଳରେ।
ପବନ ଆସିଲେ
ଡାଳ ସହ ଦୋଳି ଉଠୁଥିଲି,
ବର୍ଷା ଆସିଲେ
ବୁନ୍ଦା ବୁନ୍ଦା ଜଳରେ ଭିଜୁଥିଲି,
ସୂର୍ଯ୍ୟର କିରଣରେ
ସୁନା ପରି ଚମକୁଥିଲି।

ମୋ ଶିରାରେ ଥିଲା ସବୁଜିମା,
ମୋ ମନରେ ଥିଲା ଜଙ୍ଗଲର ଗନ୍ଧ,
ମୋ ଛାୟା ତଳେ
ଥକି ଯାଇଥିବା ମଣିଷ
କିଛି ସମୟ ପାଇଁ
ଶାନ୍ତିରେ ବସୁଥିଲା।

କିନ୍ତୁ ଦିନେ
ମୋ ଜୀବନର ଦିଗ ବଦଳିଗଲା।

ମୁଁ ଗଛଠାରୁ ବିଚ୍ଛିନ୍ନ ହେଲି,
ଖଣ୍ଡ ଖଣ୍ଡ ହୋଇଗଲି,
ପାଣିରେ ମିଶିଗଲି,
ଯନ୍ତ୍ର ଭିତରେ ଗଲି,
ଅନେକ ପରିବର୍ତ୍ତନ ପରେ
ପୁଣି ଜନ୍ମ ନେଲି...

ମୁଁ ହୋଇଗଲି
ଗୋଟିଏ କାଗଜ।

ମୋ ଦେହ ଧଳା ଥିଲା,
କିନ୍ତୁ ମୋ ଭାଗ୍ୟରେ
ଲେଖା ଥିଲା
ଅସଂଖ୍ୟ ରଙ୍ଗର କାହାଣୀ।

କେହି ମୋ ଉପରେ
ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ
ନିଜ ନାମ ଲେଖିଲା।

କେହି ଲେଖିଲା
ପ୍ରେମର ପ୍ରଥମ ଶବ୍ଦ।

ଗୋଟିଏ ଛୋଟ ଶିଶୁ
ମୋ ଉପରେ ଅକ୍ଷର ଲେଖି ଲେଖି
ନିଜ ଭବିଷ୍ୟତର
ପ୍ରଥମ ପାଦ ରଖିଲା।

ଗୋଟିଏ ମାଆ
ନିଜ ପୁଅ ପାଇଁ
ଆଶୀର୍ବାଦ ଲେଖିଲା।

ଗୋଟିଏ ବାପା
ଦୂରେ ଥିବା ଝିଅକୁ ଲେଖିଲେ—
“ସବୁବେଳେ ଖୁସିରେ ରହିବୁ।”

ଆଉ ଜଣେ ପ୍ରେମିକ
କମ୍ପିଥିବା ହାତରେ ଲେଖିଲା—
“ମୁଁ ତୁମକୁ କେବେ ଭୁଲିବି ନାହିଁ।”

ମୁଁ କିଛି କହିଲି ନାହିଁ,
କେବଳ ସେ ସବୁ ଶବ୍ଦକୁ
ମୋ ହୃଦୟ ଭିତରେ
ସାଇତି ରଖିଲି।

କେବେ ମୁଁ
ଗୋଟିଏ ପୁସ୍ତକ ହେଲି,
କେବେ କବିତା,
କେବେ ଗଳ୍ପ,
କେବେ କାହାର ସ୍ୱପ୍ନ।

କେହି ମୋ ଉପରେ
ନିଜ ଭବିଷ୍ୟତ ଲେଖିଲା,
କେହି ପୁଣି
ନିଜ ଅତୀତର ଲୁହ
ମୋ ଉପରେ ଝରାଇଲା।

ମୁଁ ଦେଖିଛି
ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀଙ୍କ ପରୀକ୍ଷା ଖାତା,
ଲେଖକଙ୍କ ନିଦହୀନ ରାତି,
କବିଙ୍କ ଅଧୁରା ପଦ,
ସୈନିକଙ୍କ ଘରକୁ ଲେଖା ଚିଠି।

ସେହି ଚିଠିରେ
ମୁଁ ଘରର ମାଟିର ଗନ୍ଧ ପାଇଛି,
ମାଆର ସ୍ନେହ ଅନୁଭବ କରିଛି,
ପରିବାରର ଅପେକ୍ଷା ଦେଖିଛି।

ଲୋକେ କୁହନ୍ତି
ମୁଁ ନିର୍ଜୀବ।

କିନ୍ତୁ ମୁଁ ଜାଣେ—
ପ୍ରତ୍ୟେକ ଲେଖା ଶବ୍ଦର
ଗୋଟିଏ ହୃଦୟ ଅଛି।

ମୋ ଉପରେ ଲେଖା
ଗୋଟିଏ ଛୋଟ ବାକ୍ୟ
କାହାର ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଜୀବନ
ବଦଳାଇ ଦେଇପାରେ।

ଗୋଟିଏ ଦସ୍ତଖତ
କାହାର ଭବିଷ୍ୟତ ନିର୍ଣ୍ଣୟ କରିପାରେ।

ଗୋଟିଏ ଚିଠି
ଦୂରେ ଥିବା ଦୁଇଟି ହୃଦୟକୁ
ପୁଣି ନିକଟକୁ ଆଣିପାରେ।

ଗୋଟିଏ କବିତା
ଭାଙ୍ଗିଯାଇଥିବା ମନରେ
ପୁଣି ଆଶାର ସକାଳ
ଜନ୍ମ ଦେଇପାରେ।

ତଥାପି
ମୋ କାହାଣୀ ସବୁବେଳେ
ସୁନ୍ଦର ନଥିଲା।

କେବେ ମୋତେ
ଚିରି ଦିଆଗଲା,
କେବେ ପୋଡ଼ି ଦିଆଗଲା,
କେବେ ଅଳିଆଗଦାରେ
ଫିଙ୍ଗି ଦିଆଗଲା।

ଯେଉଁ ମୋ ଉପରେ
କେବେ କାହାର
ସବୁଠାରୁ ମୂଲ୍ୟବାନ କଥା
ଲେଖା ହୋଇଥିଲା,

ସେହି ମୁଁ
ଦିନେ ହୋଇଗଲି
“ଅଦରକାରୀ”।

ସେତେବେଳେ ବୁଝିଲି—
ମଣିଷ ପ୍ରାୟତଃ
କୌଣସି ଜିନିଷର ମୂଲ୍ୟ
ତାହା ପାଖରେ ଥିବାବେଳେ
ବୁଝିପାରେ ନାହିଁ।

ତଥାପି ମୋର
କୌଣସି ଅଭିଯୋଗ ନାହିଁ।

କାରଣ ମୋ ଜୀବନର ଲକ୍ଷ୍ୟ
କେବଳ ବଞ୍ଚି ରହିବା ନୁହେଁ।

ମୋର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହେଉଛି—
କାହାର ହୃଦୟରେ
ଗୋଟିଏ ସତ୍ୟ
ଛାଡ଼ି ଯିବା।

ମୁଁ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଏ,
ମୋ ଅକ୍ଷର ଲିଭିଯାଏ,
ମୋ ରଙ୍ଗ ହଳଦିଆ ପଡ଼ିଯାଏ,

ତଥାପି ଯଦି
ମୋ ଉପରେ ଲେଖା
ଗୋଟିଏ ଶବ୍ଦ ମଧ୍ୟ
କାହାର ହୃଦୟରେ
ଜୀବନ୍ତ ରହିଯାଏ,

ତେବେ...

ମୁଁ ଏବେ ମଧ୍ୟ
ଜୀବନ୍ତ।

ମୁଁ କାଗଜ।

ମୋର ଆରମ୍ଭ
ଗୋଟିଏ ଗଛଠାରୁ ହୋଇଥିଲା,
କିନ୍ତୁ ମୋର ସତ୍ୟ ଗନ୍ତବ୍ୟ
ମଣିଷର ହୃଦୟ।

ମୋତେ ଭାଙ୍ଗିପାର,
ମୋତେ ଚିରିପାର,
ମୋତେ ପୋଡ଼ିପାର—

କିନ୍ତୁ ଯଦି ମୁଁ
କାହାର ମନର ସତ୍ୟକୁ
ଥରେ ମୋ ଭିତରେ
ସାଇତି ରଖିଛି,

ତେବେ ମୋ କାହାଣୀ
ମୋ ଅସ୍ତିତ୍ୱ ପରେ ମଧ୍ୟ
କେଉଁଠି ନା କେଉଁଠି
ନିଶ୍ୱାସ ନେଉଥିବ।

କାରଣ...

କାଗଜ କେବଳ କାଗଜ ନୁହେଁ।

କେବେ ସେ
କାହାର ସ୍ମୃତି,

କେବେ କାହାର ପ୍ରେମ,

କେବେ କାହାର ପ୍ରାର୍ଥନା,

କେବେ କାହାର
ଶେଷ ଚିଠି,

ଆଉ କେବେ...

କୌଣସି ଅଜଣା ମଣିଷର ହାତରେ
ଜନ୍ମ ନେଉଥିବା
ଗୋଟିଏ ନୂଆ ଦୁନିଆ।

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કાગળની કહાની

હું કાગળ છું...
સફેદ છું, શાંત છું,
પણ મારી આ શાંતિની અંદર
હજારો અવાજો જીવંત છે.

એક સમય હતો,
જ્યારે હું કોઈ વૃક્ષની ડાળ પર
લીલા પાનની સાથે હસતો હતો.
પવન આવતો ત્યારે
મારી ડાળ ધીમે ધીમે ઝૂલતી,
સૂર્યના કિરણો
મારા શરીરને સ્પર્શતા,
અને વરસાદની દરેક બૂંદ
મારી સાથે વાત કરતી.

મારી નસોમાં હરિયાળી હતી,
મારી અંદર જંગલની સુગંધ હતી,
અને મારી છાયામાં
કોઈ થાકેલો મુસાફર
થોડા સમય માટે આરામ કરતો હતો.

પણ એક દિવસ
મારી કહાની બદલાઈ ગઈ.

હું વૃક્ષથી અલગ થયો,
ટુકડાઓમાં વિખરાયો,
પાણીમાં ભળી ગયો,
મશીનોમાંથી પસાર થયો,
અને એક દિવસ
મારો નવો જન્મ થયો...

હું કાગળ બની ગયો.

મારો રંગ સફેદ હતો,
પણ મારા જીવનમાં
અસંખ્ય રંગો છુપાયેલા હતા.

કોઈએ મારા પર
પહેલી વાર પોતાનું નામ લખ્યું,
કોઈએ પ્રેમનો પહેલો શબ્દ લખ્યો.

કોઈ નાનકડા બાળકે
મારા પર અક્ષરો લખતાં લખતાં
પોતાનું ભવિષ્ય શોધ્યું.

કોઈ માતાએ
પોતાના દીકરાને આશીર્વાદ લખ્યો.

કોઈ પિતાએ
દૂર રહેલી દીકરીને લખ્યું—
“હંમેશા ખુશ રહેજે.”

અને કોઈ પ્રેમીએ
કંપતા હાથથી લખ્યું—
“હું તને ક્યારેય ભૂલીશ નહીં.”

હું ચૂપ રહ્યો,
પણ દરેક શબ્દને
મારા હૃદયમાં સાચવતો રહ્યો.

ક્યારેક હું પુસ્તક બન્યો,
ક્યારેક કવિતા,
ક્યારેક વાર્તા,
ક્યારેક કોઈનું સપનું.

ક્યારેક મારા પર
કોઈએ પોતાનું ભવિષ્ય લખ્યું,
તો ક્યારેક કોઈએ
પોતાના ભૂતકાળના આંસુ વહાવ્યા.

મેં વિદ્યાર્થીઓના
પરીક્ષાના પાનાં જોયાં,
લેખકોની લાંબી રાતો જોઈ,
કવિઓના અધૂરા શબ્દો જોયા,
અને સૈનિકોના પત્રોમાં
ઘરની માટીની સુગંધ અનુભવી.

મેં એ પણ જોયું
જે માણસ દુનિયાથી છુપાવે છે.

લોકો મને નિર્જીવ કહે છે,
પણ હું તો
દરેક લખાયેલા શબ્દની
ધડકન સાંભળું છું.

મારા પર લખાયેલી
એક નાની પંક્તિ
કોઈનું આખું જીવન બદલી શકે છે.

એક નાનકડું હસ્તાક્ષર
કોઈનું ભવિષ્ય નક્કી કરી શકે છે.

એક પત્ર
દૂર રહેલા બે હૃદયોને
ફરી નજીક લાવી શકે છે.

અને એક કવિતા
તૂટેલા મનમાં
ફરી આશાની સવાર જગાવી શકે છે.

પણ મારી કહાનીમાં
દુઃખ પણ છે.

ક્યારેક મને ફાડી નાખવામાં આવ્યો,
ક્યારેક બાળી નાખવામાં આવ્યો,
ક્યારેક કચરાપેટીમાં ફેંકી દેવામાં આવ્યો.

જેના પર ક્યારેક
કોઈની સૌથી કિંમતી વાત લખાઈ હતી,
એ જ હું
એક દિવસ નકામો બની ગયો.

ત્યારે મેં સમજ્યું—
માણસ ઘણી વાર
કોઈ વસ્તુની કિંમત
તેની પાસે હોય ત્યારે સમજતો નથી.

તેમ છતાં
મને કોઈ ફરિયાદ નથી.

કારણ કે મારું જીવન
માત્ર જીવતા રહેવા માટે નથી.

મારું જીવન છે—
કોઈના હૃદયમાં
કોઈ એક સત્ય છોડી જવું.

હું નાશ પામી જાઉં,
મારા અક્ષરો ભૂંસાઈ જાય,
મારો રંગ પીળો પડી જાય,
પણ જો મારા પર લખાયેલો
એક પણ શબ્દ
કોઈના હૃદયમાં જીવતો રહે,

તો હું હજી જીવંત છું.

હું કાગળ છું...

મારી શરૂઆત
એક વૃક્ષથી થઈ હતી,
પણ મારી સાચી મંઝિલ
માણસના હૃદયમાં છે.

મને વાળી શકો છો,
ફાડી શકો છો,
બાળી શકો છો...

પણ જો મેં
કોઈના મનની સચ્ચાઈ
એક વાર મારી અંદર સાચવી લીધી હોય,

તો મારી કહાની
મારા અસ્તિત્વ પછી પણ
ક્યાંક ને ક્યાંક
શ્વાસ લેતી રહેશે.

કારણ કે કાગળ
માત્ર કાગળ નથી હોતો...

ક્યારેક તે
કોઈની યાદ હોય છે,

ક્યારેક કોઈનો પ્રેમ,

ક્યારેક કોઈની પ્રાર્થના,

ક્યારેક કોઈની છેલ્લી ચિઠ્ઠી,

અને ક્યારેક...

કોઈ અજાણ્યા માણસના હાથમાં
જન્મ લેતી
એક નવી દુનિયા.

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कागज़ की कहानी

मैं कागज़ हूँ…
सफेद हूँ, शांत हूँ,
पर मेरी खामोशी के भीतर
हज़ारों आवाज़ें पलती हैं।

कभी मैं किसी पेड़ की शाख पर
हवा के साथ झूमता था,
सूरज की किरणों को पीता था,
बारिश की बूंदों से बातें करता था।
मेरी नसों में हरियाली थी,
मेरी साँसों में जंगल था,
मेरी छाया में कोई थका मुसाफिर
कुछ पल चैन से बैठता था।

फिर एक दिन
समय ने मेरी कहानी मोड़ दी।
मैं पेड़ से अलग हुआ,
टुकड़ों में बिखरा,
पानी में घुला,
मशीनों से गुज़रा,
और एक दिन
मैं कागज़ बनकर जन्मा।

मेरा रंग सफेद था,
लेकिन मेरा जीवन
रंगों से भी ज्यादा गहरा था।

किसी ने मुझ पर
पहली बार अपना नाम लिखा,
किसी ने प्रेम का पहला शब्द।
किसी बच्चे ने
अक्षर लिखना सीखा,
तो किसी माँ ने
अपने बेटे के लिए
आशीर्वाद लिख भेजा।

किसी प्रेमी ने लिखा—
“मैं तुम्हें हमेशा याद रखूँगा।”

किसी सैनिक के पत्र में
घर की मिट्टी की खुशबू थी।

किसी बूढ़े पिता ने
काँपते हाथों से
अपनी बेटी को लिखा,
“खुश रहना…”

और मैं चुपचाप
हर भावना को अपने भीतर
सहेजता रहा।

कभी मैं किताब बना,
कभी कविता,
कभी कहानी,
कभी किसी का सपना।

कभी मेरे ऊपर
किसी ने अपना भविष्य लिखा,
तो कभी किसी ने
अपने अतीत के आँसू गिराए।

मैंने अदालतों के फैसले देखे,
स्कूलों की कॉपियाँ देखीं,
कवियों के अधूरे शब्द देखे,
लेखकों की रातें देखीं।

मैंने वह भी देखा
जो इंसान दुनिया से छिपाता है।

कितनी अजीब बात है—
लोग मुझे निर्जीव कहते हैं,
लेकिन मैं तो
हर लिखे हुए शब्द की धड़कन सुनता हूँ।

मेरे ऊपर लिखी
एक छोटी-सी पंक्ति
किसी का जीवन बदल देती है।

एक हस्ताक्षर
किसी का भविष्य तय कर देता है।

एक पत्र
दो दूर बैठे दिलों को
फिर पास ला देता है।

एक कविता
किसी टूटे हुए मन में
फिर से सुबह जगा देती है।

लेकिन मेरी कहानी
हमेशा सुंदर नहीं रही।

कभी मुझे फाड़ दिया गया,
कभी जला दिया गया,
कभी कूड़ेदान में फेंक दिया गया।

जिस पर कभी
किसी की सबसे कीमती बात लिखी थी,
वही मैं
एक दिन बेकार कहलाया।

तब मैंने जाना—
इंसान अक्सर चीज़ों की कीमत
उनके रहते नहीं समझता।

फिर भी मैं नाराज़ नहीं हूँ।

क्योंकि मेरी नियति
सिर्फ़ बचकर रहना नहीं,
किसी के जीवन में
कुछ छोड़ जाना है।

मैं मिट जाऊँ,
मेरे अक्षर मिट जाएँ,
मेरी सतह पीली पड़ जाए—
फिर भी यदि
मेरे ऊपर लिखा कोई शब्द
किसी के दिल में जीवित है,
तो मैं अभी भी जीवित हूँ।

मैं कागज़ हूँ।

मेरी शुरुआत
एक पेड़ से हुई थी,
लेकिन मेरी मंज़िल
इंसान के हृदय में है।

मुझे मोड़ सकते हो,
फाड़ सकते हो,
जला सकते हो—

पर यदि मैंने
किसी के मन की सच्चाई
एक बार अपने भीतर रख ली,

तो वह कहानी
मेरे जाने के बाद भी
कहीं न कहीं
साँस लेती रहेगी।

क्योंकि कागज़ केवल कागज़ नहीं होता—

कभी वह
किसी की याद होता है,

कभी किसी का प्रेम,

कभी किसी की पुकार,

कभी किसी की आखिरी चिट्ठी,

और कभी…

किसी अनजान इंसान के हाथ में
जन्म लेती हुई
एक नई दुनिया

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Shree Krishna ki Giri gobardhan leela
ke madhyam se indra deb ki ahankar ko daman karte hue Dibya darshan jai shree radhe Krishna.
Hathi ghoda palki jay kanhaiya laal ki

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Radhe Krishna
shree Krishna ashtami ki Sabko hardhik subhakamayee jai jagannath