बारिश की ये नन्हीं बूंदें
अमृत बन जाती हैं
फूल मुस्काने लगते हैं
चिड़िया गीत सुनाती है
जब काली घटा घिर आती है
फसल लहर-लहर लहराती है
बुझे हुए चेहरे पर कलियाँ खिलने लगती हैं
जब मिट्टी से सोंधी-सोंधी खुशबू आती है
बारिश की ये नन्हीं बूंदें
खुशियाँ लेकर आती हैं
मन मयूर हो जाता है
डाली-डाली मुस्काती है
आँखों से सावन झरता है
जब याद किसी की आती है
बारिश की ये नन्हीं बूंदें
यादें बन जाती हैं
डॉ वंदना शर्मा