One can experiences direct experience like suspense, thriller, action, romance, murder mystery in short story, long story and red it in my written book most of the stories, novels, social, spiritual, inspirational, creative, imaginative, Psychological, etihasic, technological, love emotional, Buddha, I have written books on all these topics and write Poetry, well thought out and creative quotes.. There are occupations and passions that flow in my blood like a veil Always... by--- Shekhar Kharadi

#Budha #Buddha

जीवन की यात्रा में
मुझे एक ऐसा साथी चाहिए
जो अत्यंत दयालु हो ,
मुझसे ज्यादा बुद्ध का भिक्षु हो ।

#Budha

हे.. बुद्ध, हे शाक्यमुनि
बूंद-बूंद में बरसा दें..!
करुणा की नदी
ताकि जन-जन में ,
बहे दया-स्नेह का जल
सत्य अहिंसा के तट पर
मानवता की नौका लेकर ,
निष्ठुर, प्रपंची तन-मन पिघलाकर
हृदय परिवर्तन की यात्रा प्रारंभ करने ।।

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#Mahakali

काली कपालिनी, महिषासुर मर्दिनी
खप्परधारीणी, दुष्टों संहारणी, पापनाशीनी
शिव अर्धांगिनी, माँ आदिशक्ति
भक्ति में शक्ति, शांति में रौद्र
क्रूर में करुणा, आत्मा में परमात्मा
काल में चंडी-दुर्गा-महाकाली बनकर ,
करें हर क्षण भक्तों का संरक्षण
गुंजे समस्त ब्रह्माण्ड में, माँ तेरा ही जय..जयकार ।।

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हिचकिचाहट कैसी, बोखलाहट कैसी ?
न मैं इंग्लिश मेड़म हूं, न मैं विदेशी हुकूमत हूं !
बस में हिंद की कोमल-सरल स्वदेशी हिंदी भाषा हूं
संपूर्ण मुक्त अभिव्यक्ति, सबकी जुबां की प्यारी..
खट्टी-मीठी मिश्री बनकर, रिश्तों में घुलती
बच्चे, युवा, बूढ़े सबको गले लगाती ।

भाषा के बिना तुम जड़ व्यक्ति ,
भाषा से तुम ज्ञानी पंडित
समझ लें, पढ़ लें, लिख लें ,
जन-जन को जोड़ती, मन-मन को जानती
गांव-गांव में मिलती, शहर-शहर में पढ़ती ।

हृदय का भाव बोलती, स्नेह का गांठ खोलती ,
चेहरे पे मुस्कुराती, पुस्तक में गुनगुनाती
अक्सर कवियों, लेखकों को खूब लुभाती ,
उत्साह का द्वार खटखटाती, सुख-दुख का भाव बांटती
रूप-रंग-ढंग-चाल में ढलती, सबके साथ चलती ।

हां.. मैं, भारत की अनमोल धरोहर हूं
देवनागरी लिपि से निकली हुई ,
विद्या की नगरी से....
शिक्षा का गुणगान गाती हुई ,
सदैव एकता की पाठ पढ़ाती
इंसानियत की मिशाल सिखाती ,
हिंदी भाषा मेरा अस्तित्व, मेरी पहचान ।

सहज-सरलता के साथ
करती हूं नमस्ते समस्त भारतीयों को ,
नम्र निवेदन के साथ...,
मुझे हक़ से लिखें, दिल से पढ़े
यही मेरा सम्मान, यही मेरा गौरव ।।

-© शेखर खराड़ी
तिथि- १४/९/२०२२ , सितंबर

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व्यकि की सकारात्मक सोच से
सशक्त प्रतिभा निर्माण होती हैं ।।