दोस्तों, आज बहुत भारी मन से लिख रहा हूँ।
मेरी कहानी 'अयान: वजूद की तलाश' के 8वें चैप्टर तक सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा था, आप सबका प्यार और साथ बराबरी से मिल रहा था।
लेकिन तभी मेरी तबीयत बिगड़ गई और 10 दिनों का वो लंबा गैप आ गया।
आपको अंदाज़ा नहीं है कि उन 10 दिनों की बीमारी ने मेरी कहानी का दम तोड़ दिया।
जो पाठक हर रोज़ इंतज़ार करते थे, वो इस सन्नाटे की वजह से कहीं दूर चले गए। बीमार होने के बावजूद मेरा दिल अयान की कहानी में अटका था। जैसे ही हिम्मत जुटी, मैंने 9वां चैप्टर लिखा और आज 18वें चैप्टर तक पहुँच चुका हूँ, लेकिन पाठकों का वो शोर अब सन्नाटे में बदल गया है।
क्या मेरी रातों की वो मेहनत, वो 800-900 शब्दों को बुनने के लिए जागी हुई रातें बेकार चली जाएंगी? एक लेखक के लिए उसके पाठक ही उसकी हिम्मत होते हैं।
मेरी आप सब से गुज़ारिश है, मेरी प्रोफाइल पर जाएँ और अयान के इस सफर को फिर से ज़िंदा करें। इरफ़ान की कलम थमी थी, टूटी नहीं है। आइए और इस कहानी को फिर से वही प्यार दीजिए जिसकी ये हकदार है।"