मैं आज भी लड़ती हूँ उन पलों से…
लड़ती हूँ उन मनहूस लम्हों से
जो नींद का लालच देकर
तुम्हें मुझसे छीन ले गए।
जिनसे सालों पहले लड़ा करती थी,
आज भी कुछ लम्हे
अचानक से पुरानी यादों के बवंडर में
धकेल देते हैं मुझे।
मैं छटपटाती हूँ उससे बाहर आने के लिए…
वर्तमान से अचानक
अतीत के उन मनहूस पलों की स्मृति
मुझे किंचित विकल कर देती है।
मैं उस त्रासदी को
अपने हृदय में भी नहीं दोहराना चाहती…
फिर क्यों मेरा वक्त
हर दफ़ा वहीं जाकर ठहर जाता है?
और मैं…हर बार
उसी थमे हुए पल के सामने
खड़ी रह जाती हूँ,
जहाँ तुम थीं,और जहाँ से तुम
हमेशा के लिए ओझल हो गईं।
ArUu ✍️