मैंने चुप रहकर भी देख लिया ,
मैंने सब कहकर भी देख लिया ,
हमेशा यही नतीजा निकला ,
“मैं ही ग़लत हूँ “
और तुम दोनों ही सूरतों में ,
सिर्फ़ मेरे लिए ही “नासमझ” निकले……!
और में सब समझ कर भी नासमझ बनती फिरती हूँ,,,,
में ना हीं समझ सकती हूँ,
जब स्त्री गलती करती है ,
तब भी मर्द के आगे स्त्री को झुके रहना पड़ता है ,
अगर मर्द गलती कर दे ,
तब भी स्त्री की गलती होती है,
और तब भी स्त्री को ही झुककर कहना पड़ता है ,
“गलती हो गई आपका सच जान गई”
और नतीज़ा यही निकलता है
“ मर्द कभी ग़लत नहीं होते “ 🙏