यदि वाणी पे संयम रखा जाए तो .... रिश्ते बचाए जा सकते है।
मुझे पीड़ा मिली है इसका ये मतलब नहीं की मै लोगों को कष्ट पहोचना सुरू कर दूं।
लोगों को ये भ्रम होता है की वो सर्वश्रेष्ठ विलक्षण में से एक है.......ये घृणित मन का मैल मात्र है और कुछ नहीं ।
औकाद देखनी है तो श्री कृष्ण की देखो संसार चलाने की शक्ति होने के वावजूद भी वो एक आम जन की भाती जन्म लेते हैं। साधारण से मानव शरीर में जो की नश्वर है।
हम और आप बस इस भ्रम में जी रहे है की हम कुछ विशेष कर लेंगे किसी का....
तो मेरा एक ही जवाब है..... हे कृष्ण इस अबोध को थोड़ी सद्बुद्धि दो...क्रोध वश ये कुछ भी बोल रहा है।