दौर दिमाग वालों का है
ये दौर दिमाग वालों का है,
जहाँ चालाकी ही पहचान है।
दिल से चलोगे तो हार जाओगे,
क्योंकि सच्चाई यहाँ बेज़ुबान है।
मासूमियत बिकती है बाज़ारों में,
ईमानदारी रुला जाती है दरबारों में।
दिल वालों के हिस्से बस ठोकरें आती हैं,
दिमाग वाले ताज पहन कर जाते हैं।
फिर भी जो दिल से जीता है,
वो हारकर भी जीत लेता है…