शोहरतें थीं मगर सिम्त वो सुकूंन भर मिलाई हुई,
परवाने ए ईश्क हरेक ख़ुशी में कोई तन्हाई हुई।
राह-ए-हस्ती मेंजब इंसा खो गए सब सबूत,
दरम्यान हर जीत की शिकस्त आशनाई हुई।
लम्हा ईश्क आसमानों की बातें ज़मीं पर रहीं,
ख़्वाब आँखों में पल कर तआरूफ पराई हुई।
वहम खूब ये सूरत ईमानसे अपना जहाँ देख लिया,
गुलमादान जो मिलना भी किस्से जैसे जुदाई हुई।
रोशनी ए मैदा क़तरावक्त भी मुझको समुंदर बना,
सब्र ए इत्मीनान गिलेहर दुआ गमसे रिहाई हुई।
मुक्तसर ए तारूफ़ यादाग़ की तफ़सील छाई हुई।
सब टूटे दिलों का फसाना दुनिया क्या बनाई हुई।
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शोहरतें – प्रसिद्धि, यश
सिम्त – दिशा, ओर
सुकूंन – शांति, आराम
परवाने ए ईश्क – प्रेम के दीवाने
राह-ए-हस्ती – जीवन का मार्ग
दरम्यान – बीच में
आशनाई –समझ परिचय, पहचान
तआरूफ – परिचय, औकात
वहम – भ्रांति, गलतफहमी
सूरत – रूप, चेहरा
ईमान – विश्वास, सच्चाई
जहाँ – दुनिया
गुलमादान – बग़िया फूलों का गुच्छा
जुदाई – बिछड़ना, अलगाव
रोशनी ए मैदा – मैदान की चमक
क़तरा – बूंद, छोटा अंश
सब्र ए इत्मीनान – धैर्य और संतोष
गिले – शिकवे, शिकायतें
हर दुआ – हर प्रार्थना
गमसे रिहाई – दुख से मुक्ति
मुक्तसर – संक्षेप में
तारूफ़ – परिचय
यादाग़ – स्मृतियाँ, यादें
तफ़सील – विस्तार
फसाना – कहानी
दुनिया – संसार
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प्रतिदिन आहार में संभव करे कि साबुत अनाज जिसमें जौ, ज्वार, मक्का, बाजरा, चना मूंग मोठ आदि स्थानीय बतौर उपज को अपने भोजन में रोटी दलिया और राब में स्थान देवें और उत्तम जीवन के साथ आदर्श, स्वस्थ्य और समग्र जीवन को अग्रसर सभी रहे यदि साद्र प्रार्थना-सविनय निवेदन है ।
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जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर
मननं कुरु, चिन्तनं कुरु, कर्मभावं धारय the importance of reflection, contemplation, and maintaining the spirit of action (karma). - लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित