निगाह-ए-यार की ताबिश से जल रहा हूँ मैं
मुआर्र कैद ए मंजिल रंगत में ढल रहा हूँ मैं
हयात भर का सफर था ग़ुबार-ए-इश्क़ से
ख्याल ए हश्र में दे सरे-राह चल रहा हूँ मैं
ख़ुमार-ए-इश्क़ में हर सिम्त दिल धड़कता है
ख़्याल-ए-ज़ात में उल्फ़त में पल रहा हूँ मैं
तेरी निगाह के जान ए हसास की तमन्ना है
सुकूत-ए-दर्द में शम हर रंग मचल रहा हूँ मैं
हवादिस-ए-सफ़र या सराब-ए-इश्क़-ओ-वफ़ा
यक़ीनन-ए-ख़्वाब यकदा ताबीर मिल रहा हूँ मैं
जुल्मत के ज़िक्र से रोशन है मेरी राहों का
फ़लक के नक़्श पे यूँ फ़सल कर रहा हूँ मैं
रह-ए-वफ़ा की क़सम दीजिए सदा मुझको
अश्कों की स्याही में सहर कलम रहा हूँ मैं
मुराद-ए-इश्क़ में ताबाँ है दिल का मंजर भी
ख़याल-ए-इश्क़ की रंगत से टहल रहा हूँ मैं
नज़र-ए-इश्क़ की पुरकैफ़ तिशनगी के लिए
हर लम्हा क़ैद-ए-ग़मों में पिघल रहा हूँ मैं
जुस्तुजू में हूँ, मैं बहर-ए-इश्क़ का मोहताज
गली की हवाओं में अज्र ए गजल रहा हूँ मैं
सुकूत-ए-शब में तिलिस्मात जब टूट जाते हैं
बजा तमाम हिज्र की राहों से चल रहा हूँ मैं
ख़्वाबों तिजारत में दम ए साहिल रहा हॅू मैं
कि रूह-ए-इश्क़ में बेदाग खलल रहा हूँ मैं
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जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर
मननं कुरु, चिन्तनं कुरु, कर्मभावं धारय the importance of reflection, contemplation, and maintaining the spirit of action (karma). - लोकः समस्ताः सुखिनो भवन्तु में समाहित सहज सनातन और समग्र समाज में आदरजोग सहित सप्रेम स्वरचित - आदर सहित परिचय मैं जुगल किशोर शर्मा, बीकानेर में रहता हूॅं लेखन का शौक है मुझे स्वास्थ्य,सामाजिक समरसता एंव सनातन उद्घट सात्विकता से वैचारिकी प्रकट से लगाव है, नियमित रूप से लिंक्डिंन,युटूयूब,मातृभारती, अमर उजाला में मेरे अल्फाज सहित विभिन्न डिजीटल मीडिया में जुगल किशोर शर्मा के नाम से लेखन कार्य प्रकाशित होकर निशुल्क उपलब्ध है समय निकाल कर पढें ।